सात दिन की कथा श्रवण करने वालो के जन्मो के पाप नष्ट हो जाते हैं-पं०अनिल मिश्राभव्य भागवत सत्संग का भक्तिमय हुआ समापन
*जितेन्द्र निगम -चिचोली*
*नगर के बाजार चौक के रामलीला परिसर मे सात दिनों से चल रहे भव्य भागवत कथा सत्संग के आयोजन का रविवार को अंतिम दिन की कथा श्रवण कराने के साथ भक्ति मयी समापन हो गया. कथा विराम के पश्चात् महाआरती और फिर विशाल भोजन प्रसादी का भंडारा हुआ जो देर शाम तक चलते रहा . भंडारे में पहुँचें हजारों भक्तों ने पंगत में बैठकर भोजन प्रसादी ग्रहण की।*
*व्यास पीठ से अंतिम दिन की कथा श्रवण कराते हुये नर्मदापुरम से आये पंडित अनिल मिश्रा ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि मनुष्य द्वारा किया गया पुण्य ही उसके काम आता है.पतित पावनी गंगा के तट पर वट वृक्ष के नीचे उच्च आसन पर विराजमान 16 वर्षीय सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित से कहा कि हे राजन जिसने जन्म लिया है उसकी एक दिन मृत्यु निश्चित हैं. मौत जीवन का अंतिम सत्य है।उन्होंने बताया कि “मौत न देखे अमीर गरीब,मौत आती हैं सबके करीब” सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित से कहा कि हे राजन कथा का आज अंतिम दिन है. और मुनि के श्राप अनुसार आज तुम्हे तक्षक नाग डसेगा और तुम्हारी मृत्यु हो जाऐगी. तुम्हे डर तो नहीं लग रहा है . यह कर्मो का फल है घूम फिर कर ही सही पर मिलता जरूर है . जवाब मे राजा ने कहा कि आपसे लगातार कथा सुनने के कारण मेरे मन से मौत का डर दूर हो गया हैं।*
*पंडित अनिल मिश्रा ने कथा श्रवण कर रहे भक्तों से कहा कि सात दिनों तक श्रीमदभागवत कथा श्रवण करने से जन्मो के पाप नष्ट होते हैं,इसलिए कथा सत्संग में जरूर जाना चाहिए. और कथा भी सुनना चाहिए ।रविवार 27 नवम्बर को अंतिम दिन पंडित अनिल मिश्रा ने अपने मुखारविंद से सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित मोक्ष की कथा का विस्तार से वर्णन संगीतमयी भजनों के साथ किया इस दौरान धर्म पंडाल में बैठे श्रोता भावविभोर हो गए.*
*चिचोली नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय कन्हैयालाल पहलवान बाबा के पुत्र स्वर्गीय माधो आवलेकर की स्मृति मे उनकी पत्नी श्रीमती अनिता देवी आवलेकर,पुत्र नीतेश आवलेकर,आशीष आवलेकर एवं जितेश पिक्की आवलेकर द्वारा 21 नवम्बर से 27 नवम्बर तक की समयावधि में श्रीमदभागवत कथा सत्संग का सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया था जिसमे प्रतिदिन बड़ी संख्या मे श्रोताओं ने पहुँच कर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया. आवलेकर परिवार ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोगी बने सभी धर्मावलंबियों व इष्ट मित्रों का आभार माना हैं।*







