क्या जनसंख्या बढ़ने का इंतजार कर रही नगर परिषद❓
नागरिक अपने घर से बाहर ही नहीं निकाल पाते क्योंकि दरवाजे पर बैठा बंदर दांत दिखाते रहता है कि कदम बढ़ाया तो काट लूंगा। माना जा रहा है कि बंदरों का मुद्दा आने वाले नगर परिषद चुनाव में चुनावी मुद्दा भी बन सकता है ।
1980 मैं प्याज के कारण सरकार बदल गई थी माना जा रहा है कि बंदर का मुद्दा भी नगर सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है
कुछ ऐसे ही सवाल घोड़ाडोगरी नगर परिषद क्षेत्र की जनता के मन में गूंज रहा है की क्या नगर परिषद के जिम्मेदार नगर परिषद क्षेत्र में बंदरों की जनसंख्या बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं ।❓
ताकि टेंडर निकालकर इस समस्या का निराकरण करें। क्योंकि पिछले कई वर्षों से घोड़ाडोगरी नगर के वासी बंदरों के आतंक से परेशान हैं। तीन – चार वर्ष पहले शुरुआत में दो-तीन बंदरों ने नगर की सीमा में प्रवेश किया था । नगर में रहना प्रारंभ किया था । जिससे लोगों को लगने लगा था कि अब घोड़ाडोगरी में भी बंदरों का आतंक शुरू होने वाला है । तब से लगातार मांग उठाई जा रही है कि इन बंदरों को पकड़वाकर दूर जंगल में छोड़ दिया जाए ।
कई बार इसको लेकर नगर वासियों ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की लेकिन वन विभाग ने भी यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बंदर वन्य प्राणी की श्रेणी में नहीं आते और अब स्थिति यह हो गई है कि
घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में बंदरों की जनसंख्या 10 से 15 गुना तक बढ़ चुकी है । लगभग 20 से अधिक बंदरों के आतंक से नगरवासी परेशान है । कई लोग इन बंदरों के करण कारण घायल हो चुके हैं और फिर भी बंदरों के आतंक से मुक्त करने को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहे हैं। हाल ही में भौरा में ग्राम पंचायत और नगर वासियो द्वारा मथुरा से बंदर पकड़ने वाली टीम बुलाकर 170 बंदरों को बागदेव के जंगल में छोड़ा गया।
जिसको लेकर नगर में चर्चा है कि अभी नगर में बंदर कम है जब बढ़ जाएंगे तो टेंडर निकालकर बंदरों को पकड़ने का कार्य होगा। वैसे
नगरवासी इन बंदरों के कारण भयभीत और परेशान हैं। बंदर घर में घुस जाते हैं कोई भी सामान उठाकर ले जाते हैं लोगों का अपने घरों की छतो पर जाना मुश्किल हो गया है कई बार तो नागरिक अपने घर से बाहर ही नहीं निकाल पाते क्योंकि दरवाजे पर बैठा बंदर दांत दिखाते रहता है कि कदम बढ़ाया तो काट लूंगा ।
कुछ ऐसी ही समस्या से इन दिनों नगर वासी परेशान हैं । माना जा रहा है कि बंदरों का मुद्दा आने वाले नगर परिषद चुनाव में चुनावी मुद्दा भी बन सकता है । वर्तमान जिम्मेदारों को पार्षदों को अपने वार्ड को अपने नगर को बंदर मुक्त नहीं करने से चुनाव में नुकसान भी हो सकता है । खैर जो भी हो
जनता बंदरों के आतंक से परेशान है कई बार कई लोग घायल हो चुके हैं मात्र दो-तीन वर्षों में बंदरों की जनसंख्या नगर में 10 गुना बढ़ चुकी है फिर भी जिम्मेदार मौन है।