विधायक से कराते खिलाड़ी बोले, नहीं चाहिए डीएसओ
सात महीने बाद भी नहीं मिला स्थायी कोच, खिलाड़ी मैदान में लगा रहे दौड़ या कर रहे पीटी
एक बार फिर सडक़ पर उतरने विवश हुए खिलाड़ी
बैतूल। खेल विभाग द्वारा मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम में संचालित प्रशिक्षण केन्द्र को जानबूझकर बंद करने की साजिश रची जा रही है। 16 मार्च को इस केन्द्र पर जिला खेल एवं कल्याण अधिकारी पूजा कुरील ने बिना किसी उच्च अधिकारी के आदेश-निर्देश के ताला लगा दिया था, जिससे नाराज एक सैकड़ा खिलाडिय़ों ने सांसद, कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल स्थायी कोच दिए जाने और डीएसओ को बदलने की मांग की थी, इस घटनाक्रम को सात माह बीत गए लेकिन न तो डीएफओ का स्थानांतरण किया गया और न ही खिलाडिय़ों के लिए स्थायी कोच की ही व्यवस्था की गई। जिससे नाराज खिलाडिय़ों ने आज अभिभावकों के साथ क्षेत्रीय
विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने स्थायी कराते कोच की व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही खिलाडिय़ों के प्रति दुर्भावना रखने वाली डीएसओ पुजा कुरील को भी बैतूल से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग खिलाडिय़ों ने विधायक श्री खण्डेलवाल से की। विधायक श्री खण्डेलवाल ने खिलाडिय़ों को आश्वस्त किया है कि अगले सप्ताह वे खिलाडिय़ों से उनके ग्राउंड में ही बात करेंगे और विस्तार से उनकी समस्या को सुनने के बाद उसका निराकरण भी किया जाएगा।
टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पा रहे खिलाड़ी
विधायक हेमंत खण्डेलवाल को खिलाडिय़ों एवं उनके अभिभावकों ने ज्ञापन सौंपकर बताया कि कोच न होने की वजह से बच्चे स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पा रहे है। यदि कोई टूर्नामेंट होता है तो बच्चों को किसी विभागीय व्यक्ति के साथ टूर्नामेंट में भेजने की बजाय सीनियर खिलाडिय़ों के साथ भेज दिया जाता है। आलम यह है कि जिन खिलाडिय़ों को किक-पंच, कुमीते और काता सिखाना चाहिए उन्हें वर्तमान में या तो ग्राउंड के चक्कर लगाने कह दिया जाता है या फिर व्यायाम कराकर घर भेज देते है। बैतूल जिले के खिलाडिय़ों ने कई स्वर्ण, रजत, कास्य पदक नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। इसके अलावा भारतीय सेना एवं अर्ध सैनिक बलों की खेल टीमों में भी बैतूल के खिलाड़ी चयनित होकर देश के लिए खेल रहे है, लेकिन कराते कोच महेन्द्र सोनकर को
जबलपुर अटैच किए जाने के बाद जिले में कराते को मजबूत बनाने के लिए कोई प्रयास डीएसओ ने नहीं किए। खिलाडिय़ों का आरोप है कि डीएसओ द्वारा ग्राउंड में आने पर अक्सर उनके साथ दुर्भावना रखी जाती है। इन खिलाडिय़ों को ड्रेस, किट भी नहीं दी गई है, जबकि जिस तरह हॉकी के खिलाडिय़ों को सुविधाएं दी जा रही है उसी तरह कराते खिलाडिय़ों को भी सुविधाएं दी जानी चाहिए।
18 मार्च को सौंपा था सांसद, कलेक्टर, एसपी को ज्ञापन
खिलाडिय़ों ने बताया कि डीएसओ ने जब उनकी क्लास पर ताला लगा दिया तो सभी खिलाडिय़ों ने अभिभावकों के साथ धरना प्रदर्शन कर ताला खुलवाया था। इस दौरान डीएसओ को हटाने और स्थायी कोच को एक महीने में उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सात महीने बीत गए न डीएसओ बदली न ही कोच मिले। खिलाड़ी एवं उनके अभिभावकों का कहना है कि जल्द ही यदि उनकी मांगे नहीं मानी जाएगी तो एक बार फिर खिलाड़ी आंदोलन करने विवश होंगे।