शासकीय महाविद्यालय घोड़ाडोंगरी में 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम के प्रारंभ में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती वंदना ने भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। तत्पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ
साहेब राव झरबड़े ने नवागत अतिथि विद्वान क्रीड़ा अधिकारी डॉ पंकज गायकवाड का पुष्प गुच्छ देकर अपने महाविद्यालय में स्वागत किया, साथ ही वरिष्ठ छात्र छात्राओं द्वारा नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर लगाकर स्वागत किया गया ।कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. साहेबराव झरबड़े ने अपने उद्बोधन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा, संस्कार एवं मूल्य भी प्रदान करते हैं। इस अवसर पर प्रो. ओमप्रकाश बोरकर ने भी गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की
आधारशिला बताया।कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के नोडल अधिकारी डॉ अजय कुमार चौबे ने छात्र-छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्य तथा उनकी उपयोगिता के बारे में बताया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो सुरभि उईके ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर छात्र-छात्राओं को गुरु शिष्य परंपरा के महत्व को पौराणिक तथ्यों से समझाया।डॉ यासमीन जिया ने भी छात्रों को संबोधित किया।आकर्षक संचालन
बी.एससी. प्रथम वर्ष की छात्रा भावना एवं राधिका उईके द्वारा किया गया।दोनों छात्राओं ने गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित गीत एवं कविता का पाठ भी किया कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन डॉ भूपेंद्र पाटनकर द्वारा किया गया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं महाविद्यालयीन स्टाफ छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।