शादी के कुछ महीनों में ही टूट रहे रिश्ते
मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप गोहे ने जताई चिंता
शादी के कुछ ही महीनों में रिश्तों के टूटने के बढ़ते मामलों पर मनोवैज्ञानिक एवं पुरुष मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. संदीप गोहे ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक परिचित युवक ने उनसे संपर्क कर बताया कि शादी के कुछ महीने बाद ही उसका वैवाहिक जीवन टूटने की कगार पर पहुंच गया है।
डॉ. संदीप गोहे ने बताया कि वह युवक और उसके परिवार के साथ-साथ लड़की के पिता को भी सामाजिक रूप से जानते हैं। विवाह का निमंत्रण भी उन्हें मिला था और उस समय सभी ने नवदंपती के सुखी जीवन की कामना की थी, लेकिन कुछ ही महीनों में रिश्ता संकट में पहुंच जाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या समाज विवाह निभाने की कला खोता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से मनोवैज्ञानिक के रूप में ऐसे अनेक परिवार उनके पास पहुंच रहे हैं, जहां पति-पत्नी के बीच संवाद की जगह आरोप, समझ की जगह अहंकार और समाधान की जगह मुकदमेबाजी ने ले ली है। कुछ मामलों में वैवाहिक विवादों के दौरान झूठे आरोप, मानसिक प्रताड़ना, सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बदनामी और बिना संवाद सीधे कानूनी कार्रवाई जैसे कदम परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं। वहीं उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनेक मामलों में पुरुष वास्तव में उत्पीड़न का शिकार होती हैं, इसलिए हर मामले का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए और बिना तथ्यों के किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
– प्रदेश में आत्महत्या की समस्या गंभीर
डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि टूटते रिश्तों की सबसे बड़ी कीमत मानसिक स्वास्थ्य, बच्चों के भविष्य और कई बार लोगों के जीवन से चुकानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में आत्महत्या की समस्या गंभीर बनी हुई है। हाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जिनमें पारिवारिक समस्याएं प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पुरुषों में आत्महत्या की दर भी महिलाओं की तुलना में अधिक दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि हर मतभेद का अंत पुलिस स्टेशन और अदालत में होगा या संवाद, परामर्श और संवेदनशीलता के जरिए रिश्तों को बचाने का प्रयास किया जाएगा। उनके अनुसार आज जरूरत महिलाओं या पुरुषों के अधिकारों की नहीं, परिवारों को बचाने की है, क्योंकि एक विवाह टूटने पर दो परिवार प्रभावित होते हैं, बच्चे असुरक्षित होते हैं और समाज भी कमजोर होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम रिश्ते निभाना भूलते जा रहे हैं या उन्हें बचाने की कोशिश ही छोड़ चुके हैं।