राम मंदिर से भव्य कलश यात्रा का आयोजन

भागवत कथा के प्रथम दिन प्रातः 8:00 बजे से हीरा वाड़ी स्थित राम मंदिर से भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया जो ग्राम हीरा वाड़ी के भ्रमण करते हुए कथा स्थल चौरे फ्यूल पॉइंट तक पहुंची एवं दोपहर 3:00 से कथा का आरंभ हुआ जिसमें भागवत का महत्व बताते हुए कथा व्यास पंडित भूपेंद्र बिलगैया द्वारा जीवन में भक्ति ज्ञान वैराग्य की प्राप्ति कथा के द्वारा होती है एवं यह कथा मुक्ति को देने वाली है प्रथम दिवस की कथा में भक्तों ने कथा को श्रवण किया के प्रवाह से हरिद्धार के आनंदघाट पर श्री भगवान् का विराजमान होना –
उनके गले में वनमाला शोभा पा रही थी, उनका श्रीअंग सजल जलधर के समान श्यामवर्ण था, उसपर मनोहर पीताम्बर सुशोभित था, कटी- प्रदेश करधनी लड़ियों से सुसज्जित था, सिर पर मुकुट की लटक और कानो में कुण्डलों की झलक देखते ही बनती थी।

वे विभंग-ललित भावसे खड़े हुए चित्तको चुराये लेते थे। वक्षःस्थल पर कौस्तुभ-मणि दमक रही थी, सारा श्रीअंग हरिचंदन से चर्चित था। उस रूपकी शोभा क्या कहें, उसने तो मानों करोड़ों कामदेवों की रूप-माधुरी छीन ली थी॥ भगवान के नित्य लोक निवासी लीलापरिकर उद्धवादि वहाँ गुप्तरूपसे उस कथा को सुननेके लिये आये हुए थे, प्रभु के प्रकट होते ही चारों ओर ‘जय हो ! जय हो की ध्वनि होने लगी। उस समय भक्ति रस का अद्भुत प्रवाह चला, बार-बार अबीर-गुलांल और पृष्पोंक़ी वर्षा तथा शंक-ध्वनि होने लगी।

उस सभा में जो लोग बैठे हुए थे उन्हें अपने देह, गेह और आत्माकी भी कोई सुधि न रही। उनकी ऐसी तन्मयता देखकर नारद जी कहने लगे — मुनीश्वरगण ! आज सप्ताह श्रवण की मैंने यह बड़ी ही अलौकिक महिमा देखी। यहाँ तो जो बड़े मूर्ख, दुष्ट और पशु-पक्षी भी हैं, वे सभी अत्यन्त निष्पाप हो गये हैं॥ अतः इसमें संदेह नहीं कि कलिकाल में चित्त की शुद्धिक लिये इस भागवतकथा के समान मृत्यु-लोक में पाप का नाश करने बाला कोई दूसरा पवित्र साधन नहीं है।

मुनिवर! आप लोग बड़े कृपालु हैं, आपने संसार के कल्याण का विचार करके यह बिलकुल निराला मार्ग निकाला है। आप कृपया यह तो बताइये कि इस कथारूप सप्ताह यज्ञ के द्वारा इस संसार में कौन-कौन लोग पवित्र हो जाते है?

बोरवेल में गिरी 3 साल की बच्ची

सनकादिक ऋषि ने कहा – जो लोग सदा तरह-तरह के पाप किया करते हैं, निरन्तर दुराचार में ही तत्पर रहते हैं और उलटे मार्गों से चलते हैं तथा जो क्रोधाग्नि जलते रहने वाले, कुटिल और कामपरायण हैं, वे सभी इस कलियुग में इस सप्ताह यज्ञ से पवित्र हो जाते हैं।

जो सबसे च्युत, माता-पिता की निंदा करने वाले, तृष्णा के मारे ब्याकुल, आश्रमयर्मले रहित, दम्भी, दूसरों की उन्नति देखकर कुद़ने वाले और दूसरों को दुःख देनेवाले है, वे भी ‘कलियुग में सप्ताह यज्ञ से पवित्र हो जाते हैं। जो मदिरापान, ब्रह्महत्या, सोने की चोरी, गुरु स्त्री गमन और विश्वासघात — ये पाँच महापाप करनेवाले, छल- छदमपरायण, क्रूर, पिशाचों के समान निर्दयी, ब्राहम्णो के धन को खाने वाले और व्यभचारी हैं, ये भी इस कलयुग में सप्ताहयज्ञ से पवित्र हो जाते है, जो दुष्ट आग्रहपूर्वक सर्वदा मन, वाणी या शरीर से पाप करते रहते है, दुसरो के धन से पुष्ट होते है तथा मलिन मन और दुष्ट हदय वाले हैं, वे भी कलि युग में सप्ताह्यज्ञ से पवित्र हो जाते हैं।

नरेंद्र पटेल ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पुनः अध्यक्ष मनोनीत
नारद जी! अब हम तुम्हे इस विषय में एक प्राचीन इतिहास सुनते है, इसके सुनने से हो सब पाप नष्ट हो जाते हैं।

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