लाडो अभियान की घर-घर दस्तक

एकता के नाम से जाना जाएगा पाल निवास

( *बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को कर रहे बुलंद -अनिल यादव* )

बैतूल -लाडो अभियान की घर-घर दस्तक से बेटियों को मिल रही नई पहचान बेटी के नाम की नेमप्लेट बन रही सम्मान की पहचान, 10 वर्षों से जारी लाडो अभियान
*प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, स्वच्छ भारत अभियान और डिजिटल इंडिया* के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लाडो अभियान चलाकर घर-घर तक संदेश पहुंचाया जा रहा है।अभियान के तहत बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाकर उन्हें परिवार और समाज में पहचान व सम्मान दिलाने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2015 से शुरू हुआ यह अभियान अब देश के 28 राज्यों के साथ अमेरिका, लंदन और दुबई जैसे देशों तक अपनी पहचान बना चुका है।

लाडो अभियान के संस्थापक 2015 अनिल यादव ने बताया कि इस *पहल की शुरुआत 8 नवंबर 2015 को बेटी आयुषी यादव के जन्मदिन* पर की गई थी। तब से लगातार घर-घर जाकर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही है। उनका कहना है कि पिछले 10 वर्षों में अभियान के तहत लगभग 28 हजार किलोमीटर की यात्रा और 3,970 घरों में बेटियों के नाम की नेम प्लेट स्थापित की जा चुकी है। अनिल की एक और सोच बेटा बेटी के भेदभाव को खत्म करने के लिए अब तक सैकड़ों बेटियों का प्रथम गृह प्रवेश भी कराया गया है।

अनिल यादव ने बताया कि *अभियान का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच विकसित करना है*। उनका कहना है कि लगातार किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि आज समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव पहले की तुलना में काफी कम दिखाई देता है और बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी पहचान बना रही हैं।
इसी क्रम में बुधवार को लाडो फाउंडेशन की टीम देशबंधु वार्ड टिकारी पहुंची, जहां पिता वीरेंद्र पाल माता संगीता पाल की पुत्री एकता के जन्मदिन के अवसर पर उसके नाम की

नेम प्लेट का विधिवत पूजन कर उसे घर पर लगाई गईं । इस अवसर पर एकता के दादा बैद्यनाथ पाल दादी शशि कला पाल ने लाडो फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज में बेटियों के सम्मान और समानता की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया। *अभियान की सफलता में संस्था के सदस्यों, बेटियों के अभिभावकों, पत्रकारों और समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया गया*।

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