मानव, पर्यावरण और वन्यजीव एक-दूसरे से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं मनाया गया वन्य प्राणी संरक्षण एवं जागरूकता सप्ताह
वन परीक्षेत्र कार्यालय में मनाया गया वन्य प्राणी संरक्षण एवं जागरूकता सप्ताह रानीपुर वन परीक्षेत्र अधिकारी शरदेंदु नायक द्वारा वन परिक्षेत्र कार्यालय में वन संरक्षण एवं जागरूकता सप्ताह का कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया गया जिसमें स्कूलों बच्चों द्वारा रैली निकालकर वनों को आग व अवैध कटाई से बचाओ संबंधित नारे लगाए गए इसके पश्चात वन परिक्षेत्र अधिकारी शरदेंदु नायक द्वारा स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि
वन्यप्राणी, पशु-पक्षियों और पौधों को पूर्ण रूप से सुरक्षा प्रदान करना चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकार ने कुछ क्षेत्रों को अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी घोषित किया है। सरकार ने अधिनियम के तहत सभी जंगली जानवरों और पक्षियों आदि के शिकार पर रोक लगाई। सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान भी रखा गया। प्रकृति के अनुसार मानव, पर्यावरण और वन्यजीव एक-दूसरे से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। मानव शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ रखने, शुद्ध ऊर्जा प्राप्त करने के लिये पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना बेहद ही ज़रूरी है। पर्यावरण से ही मानव का जीवन सम्भव है और पर्यावरण को शुद्ध व साफ-सुथरा रखना है तो वन व वन्यजीवों की सुरक्षा करना ज़रूरी है।
महत्त्व
वन्यजीव सप्ताह मनाने की गंभीरता; स्कूली बच्चों, युवा लोगों और आम जनता को वन्य जीवन के बारे में शिक्षित व जागरूक करने के साथ-साथ सरकार के काम करने में, नीतियों को डिज़ाइन करने में तथा आज के बदलते परिवेश में वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों का समाधान करने में भी मदद करती है। भारत संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। यहाँ प्रत्येक दिन को महत्ता दी गई है, जिसे हम किसी न किसी रूप में मनाते हैं। इसी के चलते देश में 1अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह के रूप में मनाते हैं। वन्यजीव पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है। देश के धन का गठन इन्हीं से होता है। इसमें जंगली जानवर, पक्षी, पौधे आदि शामिल हैं।
क्यों मनाते हैं?
वन्यजीवों के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व ही न रह जाएगा, उसका जीवन संकट में पड़ जायेगा। इसलिए वन्यजीवों के महत्व को समझने व इनके प्रति जागरूक रहने के लिए सम्पूर्ण विश्व में एक अभियान के रूप में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। वन्य जीवों की सुरक्षा के लिये प्रत्येक व्यक्ति को आगे लाने के लिए भारतीय वन्य जीव बोर्ड ने वन्यजीव सप्ताह मनाने का निर्णय लिया और तब से यह 2 से 8 अक्टूबर तक प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। आज प्रकृति से जो भी प्राप्त हो रहा है, सबकी कुछ न कुछ महत्ता है। चाहे वह जीव हो या पेड़-पौधे, सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आज यदि वृक्ष हैं तो ही मानव और प्राणियों का जीवन सम्भव है। मानव हस्तक्षेप के द्वारा आज लगभग 41 हजार से भी अधिक जीवों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। उनका जीवन संकट में पड़ने लगा है। ऐसा क्यो क्या हम भूल बैठे हैं कि उनके न रहने से हमारा जीवन भी संकट में पड़ जाएगा, प्रकृति का सारा सन्तुलन बिगड़ जाएगा। विलुप्त हो रही पशु-पक्षी, पेड़-पौधों की प्रजातियों से प्रकति का सन्तुलन बिगड़ा तो मानव जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
तब मानव के पास केवल पछतावा होगा न पेड़-पौधे होंगे और नहीं जीव-जंतु रह जायेंगे। यदि अब भी हमारी आँखें खुल जायें तो हम जैव विविधता के हो रहे ह्रास को दूर कर सकते हैं। हम जीव-जंतु और वनस्पतियों की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानकर आगे बढ़ें, तभी विकास कर पायेगें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वन परिक्षेत्र अधिकारी शरदेंदु नायक डिप्टी रेंजर सुरेश कुमार झर बड़े धनराज सोनारे, कैलाश बारस्कर महेंद्र नागले, संजय सातनकर







