एकल अभियान के दायित्ववान कार्यकर्ता हुए शामिल, ग्राम बोरी में भव्य स्वागत और छाँवल धाम में भंडारे का आयोजन
बैतूल। गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति, रानीपुर के तत्वावधान में वर्ष 2026 की प्रथम जन चेतना पंच परिवर्तन पदयात्रा मंगलवार को रानीपुर आश्रम से माँ रेणुका धाम, छाँवल (आमला) के लिए रवाना हुई। यात्रा में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा एकल अभियान के दायित्ववान कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। पदयात्रा का उद्देश्य समाज में जनजागरण लाना तथा पंच परिवर्तन के पाँच प्रमुख आयामों—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व-आधारित जीवन तथा नागरिक कर्तव्यबोध एवं शिष्टाचार—का संदेश जन-जन तक पहुँचाना है।
तीन वर्षों से निरंतर संचालित हो रही पदयात्रा
गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के यात्रा प्रभारी श्री प्रतीक जी राठौर ने बताया कि यह पदयात्रा विगत तीन वर्षों से निरंतर संचालित की जा रही है। इसमें बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक सम्मिलित होते हैं। यात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाता है तथा पुष्पवर्षा कर पदयात्रियों का अभिनंदन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि यह यात्रा प्रकृति की गोद में बसे पहाड़ों और छोटे-छोटे गाँवों से होकर गुजरती है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सहभागिता, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
ग्राम बोरी में जन्मदिन पर पदयात्रियों का भव्य स्वागत
पदयात्रा के दौरान ग्राम बोरी में गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के गौ रक्षा प्रमुख जस्सी पंडित जी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर सभी पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर भारत माता की आरती की गई। ग्रामीणों एवं पदयात्रियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
इसके पश्चात पदयात्रा माँ रेणुका धाम, छाँवल पहुँची। यहाँ माता रेणुका की आरती के बाद जस्सी पंडित जी की ओर से पदयात्रियों एवं श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसादी ग्रहण की। जन्मदिन के अवसर पर सेवा एवं धार्मिक आयोजन के माध्यम से पदयात्रियों का स्वागत करना सामाजिक समरसता और सेवा भावना का सुंदर उदाहरण रहा।
संतोषी माता मंदिर से आती है धर्मध्वजा
यात्रा के ध्वजवाहक प्रमुख श्री घनश्याम जी धारनेकर ने बताया कि पदयात्रा की धर्मध्वजा यात्रा से एक दिन पूर्व बैतूल स्थित प्राचीन संतोषी माता मंदिर से रानीपुर आश्रम में बोरी वाले बाबा जी की तपस्थली पर लाई जाती है। इसके पश्चात मंगलवार को पदयात्रा माँ रेणुका धाम, छाँवल पहुँचती है, जहाँ यात्रा का समापन होता है। उन्होंने बताया कि इस पदयात्रा में कोई भी व्यक्ति सहभागी बन सकता है। यह यात्रा समाज के सभी वर्गों को जोड़ने और जनजागरण का संदेश प्रसारित करने का माध्यम है।
समाज में जागरूकता लाना मुख्य उद्देश्य
गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के संस्थापक श्री वीरेंद्र बिलगैया जी ने बताया कि जन चेतना पंच परिवर्तन पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता लाना तथा पंच परिवर्तन के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। सामाजिक समरसता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, परिवार में संस्कार, स्वावलंबन और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
समिति का प्रयास है कि यह पदयात्रा केवल यात्रा तक सीमित न रहे, बल्कि गाँवों में संवाद, सहभागिता और व्यवहारिक परिवर्तन का माध्यम बने। इसके जरिए समाज को संगठित करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया गया है।