छात्रावास के अनुशासन और कठिन परिश्रम ने दिलाई बड़ी सफलता: आर्यन भोरसे ने 422 अंकों के साथ NEET परीक्षा उत्तीर्ण की
बैतूल। प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आर्यन भोरसे ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 422 अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जिले के अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।
आर्यन भोरसे ने सीनियर अनुसूचित बालक छात्रावास, हमलापुर में रहकर अध्ययन किया तथा सुभाष हायर सेकेंडरी स्कूल, बैतूल से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कठिन परिश्रम, नियमित अध्ययन और अनुशासित दिनचर्या के बल पर देश की सबसे कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET में सफलता अर्जित की।
आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन तथा छात्रावास में मिले अनुशासित वातावरण को दिया। उन्होंने बताया कि छात्रावास में नियमित अध्ययन के घंटे, गुणवत्तापूर्ण भोजन, समयबद्ध दिनचर्या और प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, तत्कालीन सहायक आयुक्त विवेक पांडे, वर्तमान सहायक आयुक्त सुश्री वत्सला शिवहरे, सहायक संचालक सुनील जैन तथा क्षेत्र संयोजक श्री चौहान द्वारा छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को NEET, JEE Main और CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में समय-समय पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
आर्यन ने विशेष रूप से सीनियर अनुसूचित बालक छात्रावास के अधीक्षक कमलेश रॉक्से का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का प्रभावी पालन कराया तथा विद्यार्थियों को प्रतिदिन 14 से 15 घंटे नियमित अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। यही अनुशासन, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य के प्रति समर्पण उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बना।
आर्यन भोरसे की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन, अनुशासित वातावरण और सकारात्मक प्रेरणा मिले तो वे किसी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उनकी सफलता से जिले के अनेक विद्यार्थी प्रेरित होकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।