घोड़ाडोंगरी में भव्य पिंडपात चारिका सम्पन्न, भंते जी ने दिया हर सांस को शुभ कार्यों में लगाने का संदेश
घोड़ाडोंगरी। घोड़ाडोंगरी नगर में समस्त बुद्धिस्ट बंधुओं द्वारा भगवान गौतम बुद्ध की प्रेरणा से पिंडपात चारिका का आयोजन रविवार को श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में परम पूज्य भंते जी के नेतृत्व में भिक्षु संघ ने नगर के प्रमुख मार्गों पर भ्रमण किया, जहां श्रद्धालुओं ने फल एवं भोजन का दान अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
चारिका पुराने हॉस्पिटल से प्रारंभ होकर एकता चौक, होली चौक, गुरुद्वारा चौक, काली चौक होते हुए वार्ड क्रमांक-1 चंद्रशेखर वार्ड स्थित वरवड़े निवास पहुंची। पूरे मार्ग में नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भिक्षु संघ का भावपूर्ण स्वागत किया और भगवान बुद्ध के करुणा, मैत्री और अहिंसा के संदेश का प्रसार किया।
वरवड़े निवास पर भंते जी ने भिक्षु संघ के साथ सामूहिक भोजन ग्रहण किया। इसके बाद सभी उपासक-उपासिकाओं ने बुद्ध वंदना एवं पंचशील ग्रहण किया। धम्म देशना में परम पूज्य भंते जी ने कहा कि मानव शरीर तब तक जीवित रहता है, जब तक उसमें सांस चलती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को एकाग्रचित होकर अपनी सांस का महत्व समझाया और बताया कि “स्वास ही प्राण है और प्राण ही स्वास है।” जीवन की प्रत्येक सांस को शुभ कार्यों, सेवा और मानव कल्याण में लगाना चाहिए, जिससे स्वयं का भी कल्याण होता है और समाज का भी।
भंते जी ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन मानव जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता का संचार करते हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए पूरी आयोजन समिति को साधुवाद देते हुए सभी बुद्धिस्ट बंधुओं की सराहना की।
कार्यक्रम में मनोज वरवड़े, मनोज मेश्राम, सहदेव नागले, संतोष झरबड़े, रामदास ऊबनारे, प्रशांत टेनू खातरकर,कुंदन निरापुरे, रमेश चंदेलकर, बाबूराव चौकीकर, हेमराज नागले, रामदास पवन चौहान, कैलाश मालवीय, विकास सोनी, धर्मराज नागले, ज्ञानेंद्र भुमरकर, अशोक वरवड़े, लखनलाल चंदेलकर, श्रीमती अनुशैया खातरकर, नेहा खातरकर उमा चौकीकर, माया उबारे सहित घोड़ाडोंगरी, बैतूल और सारणी से आए बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।