मुख्य वक्ता *_बादल सरोज*
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मूलचन्द मेंधोनिया पत्रकार भोपाल
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आडे़गांव जिला नरसिंहपुर
कामरेड शैलेन्द्र शैली वामपंथी विचारक और देश के प्रखर वक्ताओं में से एक थे, प्रतिवर्ष 24जुलाई से 7अगस्त तक प्रदेश भर में उनके नाम पर देश और प्रदेश की गंभीर परिस्थितियों से संबंधित विषयों पर व्याख्यान माला आयोजित की जाती है। आज देश में संविधान को खत्म करने वाली शक्तियां काम कर रही हैं इसलिए *संविधान से डर किसे लगता है* विषय पर मध्य प्रदेश में कई जगह व्याख्यान दिए जा रहे हैं। इस विषय पर अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव वामपंथी विचारक कामरेड बादल सरोज ने आड़ेगाव जिला नरसिंहपुर में अपना व्याख्यान दिया।
कामरेड बादल ने बताया संविधान पहले नहीं था, 26 जनवरी 1950को लागू हुआ है, हमें यह समझने की जरूरत है कि संविधान बनाने की जरूरत क्यों पड़ी ,इन 75 साल में क्या फर्क पड़ा और संविधान को खत्म करने वाले संविधान से क्यों डरते हैं, हमारे वैज्ञानिकों ने खोज की है कि हमारे पुरखे पहले कबीलों में रहते थे लगभग 10000 साल पहले लोगों ने खेती करना , जानवर पालना एवं जहां हम बैठे हैं गेहूं की खेती करना सीख लिया था ,हमारे ही भोपाल के पास भीमबेटका है जहां 20 ,25000 साल पहले लोग कैसे रहते थे वहां पर मिलता है ,7000 साल पहले लोगों ने व्यवस्थित रहना सीख लिया ,अनाज भंडार करना आदि, उस दौरान लोग लिखना भी नहीं जानते थे लिखा भी था तो उसे कोई पढ़ भी नहीं पाए, उस दौरान हमारे देश में हर नस्ल के लोग आए हमारा क्षेत्र दक्षिण एशिया का क्षेत्र कहलाता है, हमारे क्षेत्र में ठंडी वर्षा गर्मी मनुष्यों को रहने लायक वातावरण दुनिया में सबसे बेहतर है ,जैसे दुनिया के कई क्षेत्रों में अधिक बर्फ कहीं अधिक वर्षा और भूमध्य रेखा के पास वाले देश में अति गर्मी की वजह से लोग नहीं रह पाते हैं,यही कारण है की हमारे भारत की आबादी जो आज 140 करोड सबसे अधिक है जो दुनिया की आबादी की 40% है ।
दुनिया के लोग यहां आकर बसे। वैज्ञानिकों ने ही पता लगाया कि दक्षिण अफ्रीका में ही हमारे सबके पुरखे हैं जिनकी अस्थियां आज भी सुरक्षित मौजूद है जिन्हें वैज्ञानिकों ने खोजा कि जिसे हम आज डीएनए कहते हैं उसमें जो जीन होती है मां-बाप की शक्लें शरीर से मिलती जुलती होती है और जिससे पता लगते हैं कि यह व्यक्ति का डीएनए इससे मिलता है,यहां की आबादी मुख्य रूप से आदिवासी और द्रविड़ रही है । यहां कुश मंगोल से लेकर कई लोग आए कई भाषाएं विकसित हुई , लगभग 19569भाषाएं हैं, 40हजार से ज्यादा बोलियां हैं हमारे संविधान ने 22 भाषाओं को मान्यता दी है। इतिहास बताता है इसी दौरान कविता कहानी वेद पुराण शास्त्र लिखे गए जिसमें तमिल भाषा सबसे पुरानी बताई जाती है ,भारत में भारत का संविधान यह पहली किताब मिलेगी जो की भेदभाव या उच्च नीच धर्म जाति धर्म संप्रदाय के नाम पर भेदभाव नहीं होगा जो करेगा वह दंडित होगा ऐसा नहीं होगा कि राजा का चुनाव उसका बाप या रानी के पेट से पैदा हुए बच्चे को ही मिले बल्कि अमीर गरीब के हिसाब से नहीं सबके वोट की कीमत एक होगी पढ़ने का अधिकार सभी को होगा समानता का अधिकार इस संविधान की किताब में दिया गया जो किसी भी वेद पुराण शास्त्र में नहीं मिलेगा।
*संविधान बनाने की जरूरत क्यों पड़ी*
1857 से 1947 तक 90 वर्षों तक देश के लोगों ने लाठी गोली जेल और फांसी के बावजूद गुलामी में रहते हुए कई प्रश्न पैदा हुए जिसमें चिंतन हुआ की आजाद कैसे होंगे और आजादी के बाद ऐसा क्या करें कि गुलाम नहीं हों,यह व्यवस्था कैसे होगी। भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारी और आजादी के लिए संघर्ष करने वाले देशभक्तों में तीनों बातों को लेकर बहस चली , मंथन किया कि गुलाम कब और क्यों हुए। आरएसएस और भाजपा का कहना रहता है की बाबर आया तब से गुलाम हुए यह नहीं कहते कि अंग्रेज आय तब से गुलाम हुए, क्योंकि ये अंग्रेजों के चाटुकार रहे,बाबर ही नहीं इसके पहले भी शक , कुशान,यमन सिकंदर इसका सेनापति पाटलिपुत्र का सेनापति था ।और मुगलो से गुलाम हुए।
1857 से अंग्रेजों ने अलग-अलग तरीके से देश को लूटाऔर हमारी हैसियत को मिटाया, सूरत का कपड़ा व्यापार दुनिया का पहले कपड़ा उद्योग था उस पर अंग्रेजों ने हमला किया 60000 महिलाओं के हथकरघे तोड़ दिए गए, तांबे ,पीतल, जेवरात हीरे आभूषण के रूप में हमारा देश प्रगतिशील था हमारी अर्थव्यवस्था को अंग्रेजों ने तोड़ दिया और सारा सामान लूट कर ले गए ,दादा भाई नौरोजी जो लन्दन की ब्रिटिश पार्लियामेंट में थे उन्होंने किताब में लिखा है गजनी ने 18 बार देश को जितना लूटा था उतना अंग्रेज एक साल में लूट कर ले गए ,कार्ल मार्क्स ने किताबों में लिखा है भारत के गांव स्वतंत्र थे उस समय कुम्हार , पंडित , नाई, धोबी गांव की 99 प्रतिशत पूर्ति करने वाले गांव में थे उन्हें फर्क नहीं पड़ता था की कौन राजा है। गांव का जमींदार लठेत,पुरोहित और साहूकार ए तीन लोग गांव को नियंत्रित करते थे ,हमारे देश में अंग्रेज ज्यादा से ज्यादा 2000 आए और उन्होंने उस समय की 25 करोड़ की आबादी को इन तीन लोगों के माध्यम से कंट्रोल कर लिया। *_1857 के पहले भारत नहीं था_* लक्ष्मीबाई झांसी की रानी जैसे कई राजा रानी हुए सबके अपने अपने झंडे अपनी सेनाएं थी अलग-अलग खापों में बटे हुए थे लगभग 925 रियासत हुआ करती थी, आजादी की लड़ाई के बाद संविधान में व्यवस्था दी गई की कोई भी राजा का लड़का रानी के पेट से कोई राजा नहीं निकलेगा , इसके पहले बेद, पुराण शास्त्र यदि सुन लेगा तो कान में शीशे डाल दे, याद कर लिया तो गर्दन काट दो, मुंह से उच्चारण कर दिया तो जीभ काट डालो, शंबूक को इसीलिए मार डाला गया लेकिन संविधान में अधिकार दिए गए कोई भी अपने हक के लिए धरना प्रदर्शन, अपनी बात को अभिव्यक्त कर सकते हैं,पार्टी बना सकता है । संविधान में हमें अधिकार दिया तब आजादी के बाद ही शासकीय उपक्रम चाहे वह बिजली सरकारी क्षेत्र में लोहा टेलीफोन ,शिक्षा , स्वास्थ्य आदि सार्वजनिक उपक्रम खुले । आजादी की लड़ाई में आज जिनका योगदान नहीं है वे आज इस देश को नष्ट नाबूत करने में लगे हैं उन्हें संविधान से डर लग रहा है ,मनुस्मृति पर चलना चाहते हैं।
संविधान सभा बनाते समय आरएसएस ने रैली निकाल कर रामलीला मैदान में आचार्य करपात्री जो रामराज नाम की पार्टी थी यह चाहते थे की संविधान मनुस्मृति के अनुसार ही रहे और उन्होंने उसे समय अंबेडकर जो महार जाति से थे उन्होंने कहा था एक महर के हाथ का संविधान कभी स्वीकार नहीं करेंगे, उस समय जनसंघ बना , इनके गुरु गोलबलकर ने सभी को वोट के अधिकार पर कहा कहा यह मुंड गणना है सिरों की गणना जानवरों की तरह गणना वोट का अधिकार केवल पढ़े-लिखे शिक्षितों को होना चाहिए और राज्य करने की योग्यता रहना चाहिए, जैसा कि पहले गांव एक रहते थे जमीदार, पंडित और व्यापारी के कंट्रोल में वही व्यवस्था चाहते थे ।आर्थिक नीति उनकी आज उसी तरह से चल रही है जैसा कि कोरोना काल में अमेरिका के अखबार ने लिखा दुनिया की कंपनियां की आय में गिरावट हो रही हैं पर भारत के दो लोग नंबर वन 90 करोड़ प्रति घंटा अंबानी और अडानी की 112 करोड़ प्रति घंटा के हिसाब से आमदनी बढ़ रही है। सरकारी संपत्तियों बेच दी गई, 100 करोड़ की लीज पर हजारों करोड़ों का सौदा कर दिया ,हसदेव जंगल तबाह कर दिया सब बेच दिया गया, आज गिनती के 200 लोगों का 40% पूंजी पर कब्जा है ,
पहलगाम हमले में जहां पर 25000 पर्यटकों में एक पुलिस वाला नहीं था,यदि यहां 10 लोग भी रैली निकालते हैं पुलिस लग जाती है वहां एक चौकी तक नहीं थी, इसका बदला लेने पूरा देश इस मामले में आतंकवादी हमले के खिलाफ जंग में हमारी पार्टी सहित खुला समर्थन दियालेकिन इस पंचायत में वॉशिंगटन में बैठा ट्रंप हमारी पंचायत कर रहा है जो 29 बार बोल चुका है कि मेरे कहने पर सीजफायर रोका गया और हमारे प्रधानमंत्रीजी की एक बार भी यह हिम्मत नहीं पड़ रही किट्रंप आप झूठ बोल रहे हैं , सरकार के विदेश मंत्री जी कहते हैं हमला करने के पहले हमने पाकिस्तान से बोल दिया था हम सेना पर हमला नहीं करेंगे, कोई दुश्मन पर सचेत करके हमला करेगा क्या। जो पाकिस्तान आतंकवादियों को पाल रहा है।
118 देश में अध्यक्ष हमारा देश हुआ करता था उसमें सभी देशों को यह अधिकार था कोई भी आतंकवादी गतिविधियों पर हमला कर सकते हैं, आतंकवादी पाकिस्तान ही तो पाल रहा है। उसी को अमेरिका ने अगले ही दिन पाकिस्तान के जनरल को अमेरिका ने मेहमान बना लिया, 6 दिन बाद मिलिट्री के चीफ गेस्ट आतंकवादी विरोधी संगठन का अध्यक्ष पाकिस्तान को बना दिया। भारत 118 देश का अध्यक्ष है उम्मीद थी सभी सहयोग करेंगे पहलगाम के बाद पाकिस्तान पर हमले के समय हमारे साथ कोई देश नहीं रहा जबकि 56 देशों का स्लामिक देशों का संगठन है जिसमें पाकिस्तान
75 साल में कश्मीर का मुद्दा लेकर गया उन्होंने उसे मना कर दिया कि यह आपका आंतरिक मामला है। बांग्लादेश बनाने गई हमारी सेना जब भी किसी देश ने आपत्ति नहीं ली हमारा दबाव था लेकिन आज हमारे साथ 90% काम भूटान का भारत से चलता है वह भी साथ में नहीं, नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका वर्मा भी हमारे साथ नहीं ट्रंप लगातार धमकी दे रहा है टैरिफ थोपकर अंग्रेजों जैसे गुलाम बनाने की,
500 साल पहले अमेरिका नहीं था कोलंबस ने खोज की थी लेकिन वह कहता है बाहर देश के लोगों को नौकरी नहीं देना अभी जो अमेरिका से लोगों को निकाला गया हमारे देश की नागरिकों को जिनमें बच्चे बूढ़े गर्भवती महिलाएं थी हथकड़ी और बेड़ी डालकर तीन जहाज में अमृतसर शहर में20घंटे के सफर के बाद उतरे, जिन्हें अपराधी की तरह यहां तक कि कुढ़रते हुए बाथरूम जाना पड़ा ,, दूसरी तरफ कोलंबिया एक छोटा सा देश जिसने अपने नागरिकों को इस तरह आने पर उनका जहाज ही नहीं उतरने दिया और कहा हम अपने नागरिकों को सम्मानपूर्वक लायेंगे, और लाए।कोलंबिया एक छोटा सा देश है उसने आ रहे अपने नगरों का नागरिकों का जहाज नहीं उतरने दिया कहा कि हम अपने नागरिकों को सम्मान के साथ लेंगे लेकिन मोदी जी ने हमारे नागरिकों के अपराधी की तरह यहां पर आने दिया बहुत ही दरिंदगी के साथ ट्रंप ने व्यवहार किया हमारी सरकार ने सांकेतिक विरोध तक नहीं किया। **क्यों दबाव में हैं मोदी सरकार* हमारे देश को चलाने वाले दो पूंजीपतियों के इसारे पर सरकार चल रही है,अडानी के खिलाफ अमेरिका में वारंट निकला है जिसे अमेरिका का केवल राष्ट्रपति उठा सकता है उसके लिए काम कर रहे हैं और दूसरा अंबानी सेटेलाइट के जरिए फ़ोन व्यवस्था स्टार लीग परियोजना जो एलॉन मस्क के साथ 15% शेयर के साथ अपना व्यापार करना चाहता है इन दो पूंजीपतियों के इसारे पर मोदी सरकार पूरा काम कर रही है, मोदी और ट्रंप के संयुक्त वक्तव्य को देखा जाए जिसमें अमेरिका से पेट्रोल खरीदने के लिए कहा जाता है जो की यदि अमेरिका से पेट्रोल खरीदा जाता है तो ईरान से 30%ओर रूस से 25% अधिक कीमत पर हमारे देश को तेल मिलेगा, एग्रीकल्चर मशीन और उत्पादन पर टैरिफ घटाने की घोषणा कर दी है ,अमेरिका से आने पर ढाई सौ परसेंट से 300% टैरिफ लगाते थे जिससे भारत में सस्ती मिलेंगे, अमरीका कृषि में गेहूं चावल अरहर दाल दूध आदि देगा जो देश किसानों को सबसे अधिक सब्सिडी देते हैं हमारे देश में जब₹25 किलो का दूध आएगा सस्ती दाल है एग्रीकल्चर समान आएंगे तो निश्चित है कि हमारे देश का किसान और हमारे देश के उद्योग बर्बाद होंगे।
आज 1757 से 1947 तक अंग्रेजों ने जो मुश्किलें भारत के अंदर खड़ी की थी वे मुश्किलें आज जिनका भारत की आजादी और संविधान से कोई लेना देना नहीं था उन्हें संविधान से डर लग रहा है, जैसा कि इस संविधान को बचाने के लिए लगातार 13 महीने तक दिल्ली की बॉर्डर को जाम करते हुए तमाम अधिकारों को बचाने के लिए और आज किसान मजदूर और देश की जनता कृषि विरोधी कानून हो चाहे 4लेवर कोड हो इस तानाशाही के खिलाफ आगे उतर आए हैं और यह सरकार बेशर्मी से तानाशाही पूर्वक धरना प्रदर्शन न किए जाने सोशल मीडिया पर कोई बात आ जाने पर मुकदमे बना देने ,
लाठी गोली चलाकर तानाशाही पूर्वक दबाने का प्रयास कर रही है वह देश भक्त जनता नहीं होने देगी, अभी 9जुलाई को 25करोड़ किसान मजदूर ने सड़क पर उतरकर साबित कर दिया है।उसके खिलाफ संविधान को ली लघुत करने लगी हुई है जो देश की जनता नहीं होने देगी हम सभी शैलेन्द्र शैली के सपनों को आगे बढ़ते हुए इस संविधान की रक्षा के लिए आगे आने का संकल्प लेते हैं।







