*विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर पांच जिलों में जागरूकता कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी, आत्महत्या रोकथाम का दिया संदेश*
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर ग्राम भारती महिला मंडल द्वारा टीकमगढ़, पन्ना, निवाड़ी, सागर एवं दमोह जिलों में किशोर-किशोरियों एवं समुदाय के बीच मानसिक स्वास्थ्य तथा आत्महत्या की रोकथाम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने, आत्महत्या से जुड़े मिथकों को दूर करने तथा संकट की स्थिति में समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए समुदाय को संवेदनशील बनाना रहा।
जागरूकता सत्रों में प्रतिभागियों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। तनाव, चिंता, अकेलापन, असफलता, पारिवारिक एवं आर्थिक समस्याएं, रिश्तों से जुड़ी परेशानियां तथा सामाजिक दबाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति को दोष देने के बजाय उसकी स्थिति को समझना, उसकी बात सुनना और सहयोग देना आवश्यक है।
कार्यक्रमों में आत्महत्या के संभावित जोखिम कारकों एवं चेतावनी संकेतों पर विशेष चर्चा की गई। व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक उदासी या निराशा, लोगों से दूरी बनाना, मृत्यु या मरने की बार-बार बात करना, भविष्य के प्रति उम्मीद खोना तथा अत्यधिक भावनात्मक संकट जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने के लिए प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
सत्र के दौरान बताया गया कि मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति से संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना, उसकी बात बिना किसी जजमेंट के सुनना और उसे अकेला महसूस न होने देना बेहद महत्वपूर्ण है। केवल सलाह देने के बजाय पहले व्यक्ति की बात समझना और ध्यानपूर्वक सुनना उसकी मदद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
जागरूकता कार्यक्रमों में Gatekeeper (गेटकीपर) की भूमिका को विशेष रूप से समझाया गया। बताया गया कि गेटकीपर वह जागरूक व्यक्ति है, जो किसी व्यक्ति के व्यवहार में आने वाले बदलाव या मानसिक संकट के संकेतों को पहचानकर समय पर उसके पास पहुंचता है और उसे उचित सहायता से जोड़ने में सहयोग करता है।
शिक्षक, अभिभावक, मित्र, साथी, स्वास्थ्यकर्मी, काउंसलर, साथिया/स्वयंसेवक तथा समुदाय के जागरूक नागरिक गेटकीपर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गेटकीपर का उद्देश्य समस्या का स्वयं उपचार करना नहीं, बल्कि चेतावनी संकेतों को पहचानना, संवेदनशीलता से बातचीत करना, ध्यानपूर्वक सुनना, आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति को अकेला न छोड़ना तथा परिवार, काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जोड़ना है।
कार्यक्रमों में प्रतिभागियों से अपील की गई कि मानसिक परेशानी को कमजोरी न समझें और न ही किसी व्यक्ति की समस्या का मजाक बनाएं। जरूरत पड़ने पर परिवार, मित्र, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, काउंसलर अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेने में झिझक नहीं करनी चाहिए।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आत्महत्या की रोकथाम किसी एक विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, मित्रों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और पूरे समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रमों का मुख्य संदेश रहा—
“एक संवेदनशील बातचीत, समय पर मिली मदद और एक जागरूक गेटकीपर किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”