11 महीने बचे हैं 🤔

 

इन दिनों नगर परिषद क्षेत्र घोड़ाडोंगरी में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है 11 महीने बचे हैं। यह बात आम जनता से ज्यादा जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। नगर परिषद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को अब चिंता सताने लगी है कि उनके कार्यकाल को 11 महीने बचे हैं और उसके बाद क्या होगा। क्या प्रदेश सरकार तुरंत चुनाव कराएगी या जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होते ही बागडोर ।प्रशासनिक अधिकारी संभालेंगे या फिर नगर परिषद चुनाव की घोषणा हो जाएगी तो नगर परिषद में वापसी के लिए चुनाव मैदान में कूदना पड़ेगा।

इस बार का माहौल पिछले बार से अलग होगा नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव सीधे जनता करेगी ऐसी स्थितियां का सामना करने के लिए क्षेत्र के दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस से कई लोग अध्यक्ष बनने की रणनीति बनाने में लगे हुए हैं। पिछले बार पार्षद तक के लिए एक वार्ड में 8 से 10 प्रत्याशी मैदान में उतरे हुए थे। संभावना है कि नगर परिषद अध्यक्ष के लिए भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है। अध्यक्ष/ पार्षद बनने की आकांक्षा रखने वाले भावी प्रत्याशी अब सार्वजनिक जगहों पर दिखने लगे हैं। घँटे दो घँटे पान ठेला होटल के आसपास दिखने लगे हैं लोगों से मेल जोड़ बढ़ाने में लगे हुए हैं । जनता में ऐसी छवि बनाने में लगे हुए हैं कि हम आपके ही लेवल के लोग हैं और आपका जीवन स्तर ऊंचा उठाने, नगर में विकास की गंगा बहाने और बहुत सारी जो समस्याएं हैं जिसे आम जनता जूझ रही है उनका पूरा करने का मन था। हम आम जनता के साथ मिलकर नगर विकास का सपना पूरा करेंगे ।कुछ ऐसी भावनाओं के साथ फिर से जनता को लुभाने के प्रयास प्रारंभ हो गए हैं।

वहीं घोड़ाडोंगरी नगर की जनता तो ग्राम पंचायत से नगर परिषद बनने के कारण वैसे ही परेशान है पहले तो ग्राम सभा के माध्यम से जनता को थोड़ी बहुत कुछ कहने का मौका भी मिल जाता था लेकिन इन चार वर्षो में तो कभी किसी ने जानने का प्रयास ही नहीं किया की जनता क्या चाहती है ।4 वर्ष पूर्व जो लोग जनता से बड़े-बड़े वादे करके जनता के प्रतिनिधि बने अब इन 4 वर्षों में इन्होंने अपने वार्ड के लिए क्या विकास किया। वार्ड वासियों की कितनी समस्या सुनी। इन सब का खाता भी आने वाले समय में खुल सकता है । नगर में हुए विकास कार्यों से जनता कितनी खुश है। बीच सड़क पर खुदी नालियां और उसमें गिरते-पडते लोग । नगर परिषद बनने के बाद नगर में कितना विकास हुआ और कितना कितनी राशि करोड़ों में खर्च हो गई। इन सबको लेकर चौक चौराहो पर चर्चाओं का दौर चलता है। जनता को यह तो दिख रहा है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष खर्च हो रहे हैं । लोग तो यह भी कहते हैं कि मुख्य सड़क और रेलवे स्टेशन के अलावा तो देखा जाए तो नगर में सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे शौचालय भी नहीं है जिसमें जाकर व्यक्ति थोड़ी सी राहत महसूस कर सके। इन चार वर्षो में कितना विकास हुआ यह शौचालय की सच्चाई कह रही है कि साप्ताहिक बाजार में गांव गांव से आने वाले लोग और स्थानीय लोगों के लिए शौचालय तक की सुविधा नगर परिषद के माध्यम से उपलब्ध नहीं हो पाई।

मंगलवार गुजरी बाजार में नालियों पर स्लैब नहीं डालने के कारण बाजार की सब्जियां नालियों में गिरने से आसपास के रहवासी बदबू से परेशान रहते हैं ।शनिवार बाजार में जो पहले से ही जगह की कमी से जूझ रहा है उसमें रही सही कसर सड़क के किनारे से नालिया बनाकर पूरी कर दी गई ।शाहपुर में जहां तक सरकारी जमीन है वहां आखिरी किनारे पर नालियों का निर्माण किया गया । वहीं घोड़ाडोंगरी में सड़क के किनारे से नालिया बना दी गई और उन पर स्लैब भी नहीं डाला जिसके कारण आम जनता परेशान है। फिर भी शहर में कितना विकास हुआ कितने करोड़ खर्च हुए इस पर मंथन करने की बजाय अब 11 महीने बचे हैं की चर्चा जोरों पर

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