विश्व पर्यावरण दिवस पर अनूठी पहल

पुराने वृक्ष को बचाने का उठाया बीड़ा

 

मोक्षधाम रोड में स्थिति है अनोखा पंचशंकरीय वृक्ष
जिसमें एक ही वृक्ष में एक साथ पांच पेड़ है!!!!

(घोड़ाडोंगरी) मोक्षधाम की और जाने वाली सड़क में वृक्षों की श्रृंखलाएँ चहुँओर दिखाई देती
लेकिन आज के समय आधुनिकता की ऐसी नजरें लगी कि पुराने सैंकड़ो पेड़ निर्माण व सड़कों के चौड़ीकरण की भेंट चढ़ गए और बाकी जो बचे वे उपेक्षा का शिकार हो गये । उनकी तरफ कोई देखने वाला तक नहीं बचा पहले कभी पीडब्ल्यूडी वाले चूना पोत जाते थे किन्तु अब सबने नजरें चुरा ली । परिणामस्वरूप सैंकड़ों पेड़ देखरेख के अभाव में असमय कीड़ों, दीमक व अवैध कटाई के शिकार हो गए । आज कई विशाल पेड़ सूखते हुए नजर आ रहे है।

उम्र हो गई इसलिए सूख रहे हैं यह कहकर भी हम पल्ला झाड़ लेते हैं ।
क्या बीमार होने पर बूढ़े लोगों को नहीं बचाते वैसे ही हम पेड़ भी बच सकते हैं यह सही है कि पुराने पेड़ों में दीमक-कीड़े जल्दी लग जाते हैं किन्तु थोड़ी से देखभाल से हम इन्हें बचा सकते हैं #
आज आप हम सब मिलकर नये पौधे लगाकर उन्हें पेड़ बनाने की तैयारी कर रहे हैं । लैकिन हमारी आँखों के सामने दशकों पुराने पेड़ दम तोड़ रहे हैं ।नया पेड़ लगाने के साथ अपने पूर्वजों की विरासत को भी बचायें ।

आप भी अपने आसपास के पेड़ों को चूना का घोल लगाकर सूखने से बचा सकते हैं ।
प्रायः देश के हर ग्राम-शहर का आज यही हाल है जहाँ पुराने पेड़ या तो नव निर्माण की भेंट चढ़ रहे हैं अथवा देखरेख के अभाव में असमय सूख रहे हैं ।
इसी कड़ी में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर के दीपक उइके ने एक पंच शंकरीय वृक्ष को बचाने का बीड़ा उठाया जो घोड़ाडोंगरी शासकीय कॉलेज के सामने एक पेड़ है पेड़ की खूबियां है कि इस वृक्ष में एक साथ पांच पेड़ है ऐसे वृक्ष को पंच शंकरीय वृक्ष कहा जाता है जो बड़ी मुश्किल से यदा कदा बचे है इस पेड़ के चारों तरफ कटाव होने से जड़ बाहर आने लगी थी और शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर श्री अजय चौबे ने इस और सभी का ध्यानाकर्षित करवाया

नगर के दीपक उइके ने जनअभियान के सन्तोष राजपूत ,नरेंद्र उइके, इंजीनियर पंकज धुर्वे,स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर अरविन्द सिंह,और अजय चौबे राष्ट्रीय सेवा योजना के सिसोदिया जी के साथ मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रयास करके इस पेड़ के चारों तरफ चबूतरा बनवाने का कार्य प्रारंभ किया अब निरंतर कटाव से इसकी जड़ कमजोर होने से बचेंगी और पेड़ की उम्र बढ़ेगी और कुछ दशक ओर इनके छांव का आनन्द नई पीढ़ी को दे सकते हैं ।

Comments are closed.