पंडित प्रदीप मिश्रा बोले – धर्म परिवर्तन पर बोले दुसरो की जूठन खाने से अपने घर की रूखी रोटी खा लो,विडम्बना है भारत मे तिलक लगाकर जाने पर बच्चो को स्कूल से निकाला जाता है।बच्चो को सीखा रहे टिंकल टिंकल लिटिल स्टार- आज स्टार लटक रहे है।बैतूल कलेक्टर की तारीफ की

प्रवीण अग्रवाल

ताप्ती शिवपुराण कथा में आज चौथे दिन प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आर्केस्ट्रा में भीड़ हो जाती है पर धार्मिक आयोजन में इतनी भीड़ आपका भरोसा आपकी दृढ़ता है शिव की भक्ति खाली नहीं जाती।बारिश को लेकर कहा जो सेवक लगे हैं उनकी भी परीक्षा है।प्रभु भक्ति और भाव को देखते हैं। सारे देवताओं ने अमृत पिया और महादेव ने विष पिया यही वात्सल्यता है । हमें प्रसाद भी मिलता है तो किसी को कम किसी को ज्यादा मिलता है तो विचार करने लगते हैं वही अमृत देवताओं ने किया और विष शिव ने पिया यही शंकर का भोलापन है इसीलिए उन्हें भोले भंडारी के रूप में भी जाना जाता है।जो आया है वह कम नहीं और जो नहीं मिला उसका गम नहीं है यही भाव जीवन में जो रखेगा वही सुखी रहेगा।सबसे ज्यादा विष पीना पड़ता है नारी को सारी चिंताओं का घर परिवार का।ताप्ती मैया ने इतना तप किया की तप के कारण उनका नाम ताप्ती पड़ा। ताप्ती मैया इतनी सुंदर हैं की इंद्रदेव 5 बार उनके दर्शन करने सूर्य भगवान के यहाँ गए थे।केवल 7 वर्ष की आयु में मां ताप्ती ने महादेव की आराधना कर प्रसन्न कर लिया था।घड़ी तुम्हारी है लेकिन समय का चक्र अलग है बुरा समय बीत जाता है तो अच्छा समय भी आ जाता है।कार्तिक महीने में यम द्वितीया के दिन यमुना का स्नान ,चतुर्थी के दिन ताप्ती का स्नान जो करेगा उसे सुख भोगने को मिलेगा यह वरदान भद्रा ने मां ताप्ती और यमुना को दिया था। यह जीवन का सुख आनंद प्रदान करता है।बैतूल वालों को ताप्ती पुराण की कथा सुनने को मिली है यह जीवन में उतारना है ।मां मां होती है मां की करुणा के कारण मां की वात्सल्यता के कारण मां सुंदर होती है।प्रशासन और समिति ने बहुत अच्छी व्यवस्था कि है सेवा करने वाले भी मन से सेवा कर रहे हैं ।प्रभु का धन्यवाद अदा करना चाहिए कि उन्होंने अच्छा शरीर दिया इतनी सुंदरता दी है अच्छा परिवार अच्छा जीवन दिया है।श्रद्धालुओं के पत्र पढ़कर बताया की भगवान की भक्ति करने से व्रत करने से श्रद्धा रखने से जो जीवन में फायदा हुआ है उसके बारे में बताया ।भगवान पर विश्वास रखने से हमारे जीवन की सारी बाधाएं दूर होती चली जाती है।अपने घर में भले चटनी रोटी मिले वह खाकर गुजारा कर लेना पर किसी का जूठा खाने मत जाना। बहुत लोभ और लालच दिखाया जाएगा दूसरे धर्म के लोग लालच दे देकर बुला लेते हैं थोड़े दिन लड्डू पेड़ा खिला देंगे बाद में कोई नहीं पूछेगा लालच में बिल्कुल मत आना अपने घर की रूखी रोटी खा लेना दूसरे के यहां जाकर जूठन मत खाना नहीं तो दशा मंदिर की घंटी की तरह हो जाएगी ना इधर के रहोगे ना उधर के ।

शिव आराधना का क्या फल मिल सकता है क्या आनंद मिल सकता है उसको लेकर एक पत्र पढ़कर सुनाया। एक लोटा जल और एक बेलपत्र चढ़ाना शुरू किया बाबा से कहा आप सत्य के प्रतीक हो भोलेनाथ की कृपा ऐसी हुई की सत्य की जीत हुई।श्री शिवाय नमस्तुभ्यं इस मंत्र का जो जाप करता है उसका शिव महापुराण में क्या महत्व है उसके बारे में वर्णन किया और मंत्र के जाप का महत्व श्रद्धालुओं को बताया।उन्होंने श्रद्धालुओं से पूछा कि मरने का समय नहाने के पहले का होता है या नहाने के बाद मरने का समय नहीं देखा जाता उसी तरह मंत्र जाप का भी समय नहीं देखा जाता।

बर्तन गंदा होता है तो दूध फटता है आप कैसा दिल लेकर बैठे हो आप कैसा मन लेकर बैठे हो यह आपके ऊपर है अपने पात्र को साफ सुथरा रखो मन को साफ सुथरा रखो तो दूध नहीं फटेगा। हम बदलेंगे युग बदलेगा हम सुधरेंगे युग सुधरेगा, कब सुधरेगा जब हम सुधरेंगे जो जैसा पात्र होगा वैसा उसको फल मिलेगा ।कथा कहने वाले ने कथा कह दी यह आपने किस तरीके से ग्रहण की यह आपके ऊपर है।हम दुनिया को बदलना चाहे लेकिन खुद को नहीं बदलेंगे जब तक स्वयं को नहीं बदलेंगे तब तक कोई सुधार नहीं होगा। हम अपने आप को सुधारना ही नहीं चाहते।

बैतूल की बेटियों से बेटियों से निवेदन किया की मां ताप्ती जैसा भाव रखना चाहिए कि मां ताप्ती ने कहा था जहां पिता कहेंगे वहां शादी करूंगी।अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म में विवाह नही करेंगे जब दूसरा व्यक्ति तुम्हारा धर्म छुड़ाकर खुद के धर्म में तुम्हें शामिल कर लेता है तो तुम्हें इतना सामर्थ होना चाहिए कि उसका धर्म चेंज करवा सको । सारी समस्या का हल एक लोटा जल ।धर्म बदलने के लिए लोग किताबें बांट रहे हैं ।राजा स्वर्ण को मां ताप्ती से विवाह करने के लिए कई परीक्षाएं देनी पड़ी लेकिन मां ताप्ती ने कोई परीक्षा नहीं दी ऐसी दृढ़ता रखो ।
एक बेटी का पिता उसके जन्म से विवाह की तैयारियां करना शुरू कर देता है और वही बेटी जब परिवार को छोड़कर अपनी मर्जी से विवाह करती है तो क्या गुजरती है यह वही जानता है।शादी में आए हुए लोग खाने पीने में कमी निकाल कर चले जाते हैं पर उस बाप की भी सोचना चाहिए जिसने एक-एक पैसा जोड़कर विवाह किया।बेटियों से कहा कि बाप भी कोई दौलत से कम नहीं है पिता जब तक है दुनिया की सारी दौलत तुम्हारी है तुम राजकुमारी हो बेटों से कहा – पिता है तो पलटकर देखने की जरूरत नहीं पड़ती । पिता को पहचानो , पापा दोस्त हैं ,तुम्हारी दौलत है, तुम्हारे मित्र जिसने पहचान लिया ,भले बंगला कोठी तुम्हारा होगा पिता चला गया तो समझ लो दुनिया की सारी दौलत चली गई ।

जो नारी कार्तिक महीने का मां ताप्ती का स्नान करती है उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।जो ज्ञान दे भले ही वह छोटा क्यों ना हो उसे बड़ा मानकर ज्ञान ले लेना चाहिए।बैतूल में हमारा आना भी कोई आज का नहीं है कोई ईश्वर ने पुराना संबंध रखा होगा तो आज बैतूल में हमारा कथा कहना और आपका सुनना है।

विडम्बना ऐसी है कि भारत की भूमि के स्कूलों में तिलक लगाकर जाने और हाथ में मोली बांधकर चले जाने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जाता है। घर में बच्चों को गायत्री मंत्र और शिव का जाप सिखाना चालू करें ।वह अंग्रेजी की पोयम सिखा रहे हैं । हम हमारे बच्चों को हमारी सभ्यता हनुमान चालीसा की चौपाई सिखाये ।घर में मेहमान आए तो उन्हें बच्चे पोयम नहीं हनुमान चालीसा, गायत्री मंत्र, शिव मंत्र सुनाएं। अपने बच्चों को क्या दे रहे हो टिंकल टिंकल लिटिल स्टार और आज स्टार लटक रहे हैं। ऐसी स्थिति पैदा हो गई है।बच्चे को ज्ञान होना चाहिए कि बड़ों का आदर करना माता-पिता का सम्मान करना बड़ों से सम्मान से बात करना। घर में बहू अच्छी आ जाए तो समझ लेना पूर्व जन्म में गाय को रोटी दी थी तो आज रोटी मिल रही है ।

अपने बच्चों को लेकर फिल्म देखने जाते हो होटल में जाते हो हफ्ते में एक बार बच्चों को गौशाला लेकर जाया करो । अगर कोई संस्कार विहीन है तो उसका कोई मतलब नहीं ।जिसमें संस्कार नहीं है उसको चंदन लगाने का हक भी नहीं है।बैतूल में देखा कि आसपास के गांव से जो लोग आ रहे हैं उनको देखकर लग रहा है कि उनमें श्रद्धा है भक्ति है।

कलेक्टर को धन्यवाद देते हुए कहां की जो प्रशासन लगा है वह बड़ी सभ्यता सौम्यता के साथ श्रद्धालुओं की सेवा कर रहा है।बैतूल में गन्ना होता है और और गन्ने के रस में उसमें जैसी मिठास होती है लगता है बैतूल के लोगों ने बहुत गन्ने का रस पिया है और उसी की तरह मीठे हैं।

 

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