पंडित प्रदीप मिश्रा : भोलेनाथ के विवाह में जो सबसे आगे थे आज उन्ही को राजनीति के चक्कर में सनातन धर्म से तोड़ रहे हैं ।दुनिया में सबसे जहरीला व्यक्ति इंसान है ।तुम्हारे तुम्हारे साथ रहेगा तुम्हारे साथ खाएगा पर कब तुमको चूना लगा देगा तुमको मालूम नहीं पड़ पाएगा ।
आज पांचवे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा भगवान शिव की भक्ति महादेव की पावन कथा मां ताप्ती शिवपुराण की कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। संपूर्ण ब्रह्मांड का सुख प्रदान करने वाले महादेव भगवान की भक्ति में बैठ तो जाते हैं पर चित् को नहीं लगा पाते इस मन को लगाना बड़ा कठिन है भगवान की भक्ति बड़ी कठिन है।भक्ति भजन भजन में बल है तो प्रभु भी पूरे बल से प्रदान करता है केवल हमें अपनी भक्ति के वजन को बढ़ाना है। जिसने बहुत सारा धन बढ़ाया उसकी मूर्ति किसी चौराहे पर नहीं दिखेगी लेकिन जिसने गरीब के हित में काम किया उसकी मूर्ति चौराहे पर दिखेगी। धन जोड़ने वाले की मूर्ति कभी चौराहे पर नहीं लगती लेकिन जिसने शरीर के द्वारा सांसारिक जीवन का कल्याण किया उसकी मूर्ति चौराहे पर लग जाती है उसको राष्ट्रपति सम्मान मिल जाता है।
इतना पैसा खर्च करके अपने गांव शहर से कथा सुनने आते हैं सुबह 6 बजे से इंतजार करते हैं लेकिन कथा के समय आपस में एक दूसरे को देखना और बात करना क्या सही है चित् लगाकर कथा सुनो। वैभव बढ़ाने से सम्मान नहीं मिलेगा किसी गरीब का भला करने में ही सम्मान मिलेगा शरीर से नहीं दिल से भजन करो।दिनभर माला फेरने से भगवान नहीं आएगा लेकिन 1 दिन अगर दिल से उसे पुकार लिया तो सुन लेगा।कसम से बुराई कभी नहीं छूटती।
बैतूल में कल पानी की एक बूंद से महादेव ने अपना स्वरूप बनाकर बता दिया कि वह भी यहां पर घूम रहा है।पहले जंगल थे तो जानवर से भय रहता था अब जंगल तो बचे नहीं जानवर भी बचे नहीं। फिर भी डर है इंसान को इंसान से ही डर लगता है। आज भाई ही भाई की जायदाद खा जाता है। इंसान को इंसान से डर लगता है। छोटी सी बेटी के साथ उसी के रिश्तेदार गलत करते है। मनुष्य को कैसे पहचाने कि हमारे साथ खड़े होकर हमको ही खा जाएगा दुनिया में सबसे जहरीला व्यक्ति इंसान है ।तुम्हारे तुम्हारे साथ रहेगा तुम्हारे साथ खाएगा पर कब तुमको चूना लगा देगा तुमको मालूम नहीं पड़ पाएगा ।बहुत कठिन जीवन है मनुष्य का। इंसान को पहचानना कठिन है।
प्रयास करो अपने जीवन में एक बिल पत्रि का पेड़ लगाओ जिसकी पत्तियां पत्ती महादेव पर चढ़ेगी तो आपका जीवन सफल होगा।जब एक लोटा जल शिवजी को चढ़ाओ तो दिल से चढाओ।इतना मतलबी लोग हैं इस संसार में आगे बैठने के चक्कर में पता नहीं कहां-कहां से फोन लगवा देते हैं।
ना कोई आदिवासी ना कोई वनवासी है यह सब मेरे महादेव के प्राण हैं। दुनिया के लोग राजनीति के चक्कर में इनको पीछे हटा देते हैं।महादेव ने अपने विवाह में सबसे पहले आदिवासी वनवासी को निमंत्रण भेजे।ये सब बरात में सबसे आगे चल रहे थे उसके बाद देवता चल रहे थे।कोई वनवासी नहीं कोई आदिवासी नहीं राजनीति के चक्कर में इनको सनातन धर्म से तोड़ रहे हैं ।
ऐसे जीवन पर धिक्कार है जो भक्तों के भगवान पर जल चढ़ाने बेलपत्र चढ़ाने से तकलीफ होती है ऐसे लोगों का जीवन चुल्लू भर पानी मैं डूबने के बराबर है।दूर के ढोल सुहावने जो बहु 4 दिन के लिए आती है वह अच्छी लगती है जो पास में रहती है वह बुरी लगती है।रिश्तेदार शादी में तो आगे रहते हैं लेकिन श्मशान में देखते हैं और कितना समय लगेगा।राम शिव कृष्ण सब एक हैं दुनिया के लोगों ने अपनी अपनी चलाने के लिए भेद कर दिए।
दिनभर चुगली निंदा बुराई में लगी रही अपना जीवन बर्बाद कर रहे।इंसान को लेकर कहा दूसरे में बुराई देखने की आदत नहीं होती तो कितना अच्छा होता।जब पाप बढ़ता है तो पुण्य छोटा होता चला जाता है।ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो स्वर्ग नहीं जाना चाहता।जो गया वह आज तक आकर नहीं बताया कि वह स्वर्ग में है या न नरक में ।अगर खाने को अच्छे से मिल रहा है कोई रोग बीमारी नहीं है तो समझो कि यही स्वर्ग मिल रहा है स्वर्ग में हो।
कोई घर में एक भाग्य वाला होता है जिसके कारण भगवान हमें खूब देता है सामूहिक परिवार में जब एकजुटता से रहते हैं तो किसी के भाग्य से परिवार सुखी रहता है जब बट जाते हैं तो भाग्य भी बट जाता है।परिवार से अलग तो हो जाओगे पर वह सुख नहीं मिल पाएगा जो परिवार में साथ रहने पर मिलता है जो सुख परिवार की एकता में वह कहीं नहीं है ।
जब घर घर में शिव की पूजा होगी तो महादेव घर-घर में कुबेर का भंडार खोल देता है।सावन के महीने में जब घर के अंदर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन करते हैं तो उस घर में कभी अकाल नहीं पड़ता।घर घर में शिवलिंग के निर्माण कोरोना में कराया था जिसका परिणाम है कि अन्य देश महामारी से निकल नहीं पाया वही हमारा भारत देश कोरोना से उबर कर आगे बढ़ रहा है।जब दुख की घड़ी तुम्हारे सामने आकर खड़ी हो जाए तो बेलपत्र के पेड़ के नीचे की मिट्टी उठाकर शिवलिंग बनाकर पूजन करके विसर्जन कर देना ।शिव आराधना का सुख साधारण नहीं है।