हर्ष उल्लास के साथ महापर्व छठ मनाने की तैयारी पूरी, 4 दिनों तक मनाया जाता है छठ महापर्व

सारनी। नगर पालिका परिषद सारनी के अंतर्गत विद्युत नगरी सारनी कोयलांचल क्षेत्र पाथाखेड़ा के शिव मंदिर में महापर्व छठ की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है।शनिवार को छठ घाट स्टीम वालों पर नपा अध्यक्ष किशोर बरदे, भोजपुरी एकता मंच के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह एवं सारनी थाना प्रभारी रत्नाकर हिगवे,जीपी सिह,सुधा चन्द्रा, विनय मदने,संजीत चौघरी सहित अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से छठ घाट स्थल का निरीक्षण किया गया एवं किसी भी तरह की कोई कमी ना रहे इसको देखते हुए संबंधित ठेकेदार को दिशानिर्देश देने का कार्य किया गया है। थाना प्रभारी रत्नाकर
हिंगवे ने बताया कि उत्तर भारतीयों का सबसे बड़ा पर्व है और इस पर्व में आवागमन में ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित हो इस लिए अलग-अलग तीन स्थानों पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए पार्किंग स्थल बनाया गया है उन्होंने संपूर्ण क्षेत्र वासियों से अपील की है कि पुलिस के जवान अपना कार्य निष्ठा और ईमानदारी के साथ करते हैं कृपया उनके साथ पार्किंग स्थल पर किसी भी तरह की बहस अथवा अनावश्यक तनाव का कार्य ना करें।
आस्था का केंद्र है छठ पर्व
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से छठ पूजा को आस्था का पर्व कहा जाता है, जिसमें सूर्य देव की उपासना की जाती है। महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि यानी छठे दिन मनाये जाने के कारण इसे छठ पर्व कहा जाता है। पूर्वांचल क्षेत्र के लोग बड़े हर्ष उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं 4 दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएं निर्जल रहकर उपवास करने का कार्य करती है दो दिन छोटी और दो दिन बड़ी छठ मनाने का कार्य किया जाता है। छोटी छठ को घर में ही मनाया जाता है जिसका समापन शनिवार को
प्रसादी वितरण करने के बाद किया जाएगा जबकि बड़ी छठ डूबते हुए सूरज को रविवार शाम को अरग देने के अलावा सोमवार सुबह उगते हुए सूरज की पूजा करने के बाद 4 दिनों तक मनाए जाने वाले छठ पर्व का समापन किया जाएगा।
दीपावली के 6 दिन बाद मनाया जाता है आस्था का महापर्व छठ
छठ पर्व,छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार,झारखण्ड, पश्चिम बंगाल,पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व मैथिल,मगध और भोजपुरी लोगो का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं। यहा पर्व बिहार कि
वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार बिहार मे यहा पर्व मनाया जाता हैं। नगर पालिका परिषद सारनी क्षेत्र में घोड़ाडोगरी के देनवा नदी,नांदिया घाट के तवा नदी,पाथाखेड़ा के शिव मंदिर और सारनी के सतपुड़ा डैम स्टीम वालों के पास बड़े हर्ष उल्लास के साथ प्रशासनिक देखरेख और निगरानी के बीच यह महापर्व मनाने का कार्य किया जाता है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की कोई चूक ना हो इसे देखते हुए सारनी एसडीओपी रोशन कुमार जैन
के नेतृत्व में थाना प्रभारी रत्नाकर हिगवे एवं पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी रवि शाक्य के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।