योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा शिविर में दूसरे दिन एक्यूपंक्चर एवं एक्यूप्रेशर चिकित्सा का विशेष प्रशिक्षण, डिटॉक्स के महत्व पर दिया गया विशेष मार्गदर्शन

बैतूल। गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति (GGSS) के तत्वावधान में परम तपस्वी संत श्री श्री १००८ निकूदास जी महाराज ध्यान एवं साधना केंद्र, रानीपुर आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय “मनःशांति एवं शरीर शुद्धि” योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं आध्यात्मिक शिविर के दूसरे दिन प्राकृतिक चिकित्सा की विभिन्न उपचार पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्राकृतिक जीवनशैली एवं समग्र स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण एक्यूपंक्चर एवं एक्यूप्रेशर चिकित्सा रहा। डॉ. नवीन वागद्रे एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को शरीर के महत्वपूर्ण एक्यूपंक्चर एवं एक्यूप्रेशर बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इन उपचार पद्धतियों के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को संतुलित कर गर्दन एवं कमर दर्द, सर्वाइकल, घुटनों के दर्द, माइग्रेन, तनाव, अनिद्रा तथा जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं में प्रभावी लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस दौरान प्रतिभागियों को इन उपचारों का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया।
शिविर में योग, प्राणायाम, ध्यान, जलनेति, सूत्रनेति, त्रिफला नेत्र प्रक्षालन, कुंजल क्रिया, कटि स्नान, हॉट फुट बाथ, ऑरिकुलोथेरेपी, कपिंग थेरेपी, पोटली मसाज, डिटॉक्स जूस, व्हीटग्रास जूस, फलाहार तथा सात्त्विक जीवनशैली पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने इन सभी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर प्राकृतिक चिकित्सा के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।

इस अवसर पर डॉ. नवीन वागद्रे ने शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया पर विशेष व्याख्यान देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी वाहन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए समय-समय पर उसकी सर्विसिंग आवश्यक होती है, उसी प्रकार मानव शरीर को भी समय-समय पर आंतरिक शुद्धि (डिटॉक्स) की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अनियमित खानपान, तनाव, प्रदूषण एवं निष्क्रिय जीवनशैली के कारण शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। योग, प्राकृतिक चिकित्सा, संतुलित आहार, पर्याप्त विश्राम एवं नियमित डिटॉक्स प्रक्रियाएँ शरीर की स्वाभाविक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सशक्त बनाकर दीर्घकालीन स्वास्थ्य प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर व्यक्ति को संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाना है।
शिविर के सफल संचालन में डॉ. नवीन वागद्रे की टीम के सदस्य परमेंद्र साहू, उपासना बारस्कर, प्रतीक्षा वागद्रे, धर्मी सेलू, भवेश टेकपुरे, कार्तिक साहू, अंकित कापसे, प्रीतम यादव ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने विभिन्न उपचार पद्धतियों का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ शिविर की व्यवस्थाओं का भी सफल संचालन किया।
प्रतिभागियों ने रानीपुर आश्रम के शांत, प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा शिविर केवल स्वास्थ्य सुधारने का माध्यम नहीं, बल्कि तनावमुक्त, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी देता है।

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