*कलश यात्रा के साथ हीरावाड़ी में शुरू हुई संगीतमय सात दिवसीय भागवत कथा*
*वृंदावन के पं. बृजेश कृष्ण पाठक बोले- भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप, इसके श्रवण मात्र से पापी का भी हो जाता है उद्धार*
रानीपुर ।
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मेहकार के ग्राम हीरावाड़ी में मंगलवार से सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। हीरावाड़ी के मलैया परिवार द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के प्रथम दिन गांव में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण कर शामिल हुए। गाजे-बाजे और मंगल गीतों के साथ निकली यह यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जहां ग्रामीणों ने जगह-जगह पलक-पावड़े बिछाकर यात्रा का आत्मीय स्वागत किया।
जगह-जगह हुआ पूजन, पुष्प वर्षा से स्वागत
मुख्य मार्गों से गुजरने के दौरान ग्रामीणों ने न केवल कलश यात्रा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया, बल्कि पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन भी किया। पूरे गांव का माहौल भक्तिमय और उत्सव जैसा नजर आया। भ्रमण के पश्चात कलश यात्रा का समापन कथा स्थल पर हुआ, जिसके बाद मुख्य यजमान द्वारा श्रीमद्भागवत ग्रंथ और व्यासपीठ का पूजन कर कथा का विधिवत श्रीगणेश किया गया।
धुंधकारी की कथा से समझाया भागवत का महत्व
वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथाव्यास पंडित बृजेश कृष्ण पाठक ने कथा के प्रथम दिन भागवत महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने धुंधकारी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए विस्तारपूर्वक बताया कि किस तरह महापापी धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिली। पंडित जी ने कहा, “धुंधकारी की मुक्ति केवल श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही संभव हो सकी। स्वयं धुंधकारी ने स्वीकार किया था कि भागवत कथा धन्य है, जिससे मुझ जैसे पापी का भी उद्धार हो गया, जबकि मेरा मोक्ष गया जी में श्राद्ध करने पर भी नहीं हो पाया था।”
अधिक मास के पावन पर्व पर कथा सुनना सौभाग्य
कथाव्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। भागवत का श्रवण और दर्शन करने मात्र से जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वर्तमान में चल रहे इस अधिक मास के पावन पर्व पर कथा सुनने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस पवित्र महीने में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कथा का रसपान करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।
कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
कथा के पहले ही दिन हीरावाड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। मलैया परिवार के अनिल मलैया राकेश मलैया एवं सदस्यों ने बताया कि आगामी सात दिनों तक कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों जैसे कृष्ण जन्म, छप्पन भोग, रुक्मिणी विवाह आदि का सजीव वर्णन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।