परिश्रम की पराकाष्ठा का पर्याय हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

दो साल बेमिसाल

भोपाल। जब भाजपा कार्यालय में विधायक दल की बैठक में दिल्ली से आए पर्यवेक्षक ने एक पर्ची पढी़ उस पर्ची में एक ऐसे विधायक और पूर्व मंत्री का नाम था जिसके विषय में ना तो किसी ने सोचा था और ना ही किसी प्रकार की कोई चर्चा ही सुनी थी लेकिन विधायक इस बात से आस्वस्त थे कि हाईकमान ने जो निर्णय लिया है वह निश्चित ही पार्टी के लिए और प्रदेश की जनता के लिए हितकारी होगा और हुआ भी वही । मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूरी 29 की 29 सीट जीतकर जनता में उनकी स्वीकार्यता पर अपनी मोहर लगा दी। डॉ मोहन यादव का मुख्यमंत्री के रूप में दो वर्ष का सफलतम् कार्यकाल, पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना में सबसे अलग है ,सबसे हटकर है । मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने समकालीन और पूर्ववर्तियों के अनुभवों से यह बखूबी समझ लिया है कि प्रदेश का मुखिया होने की जिम्मेदारी फाइलों, बैठकों, तबादलों और पदस्थापनाओं, उद्घाटन और शिलान्यास से अलग भी हो सकती है । प्रदेश की जमीन, उसकी संस्कृति और परंपराओं, लोगों के मिजाज की गहराई से पहचान रखने वाले डॉ यादव यह समझ सके हैं कि उनकी इस मातृभूमि और मुखिया के रूप में कर्मभूमि की खूबियां और खामियां क्या है ।

वे मानते हैं कि प्रदेश में स्वर्णिम प्रदेश बनने की तमाम क्षमताएं और संभावनाएं मौजूद हैं। उनका पूरा फोकस सिर्फ विकास पर ही नहीं है बल्कि वे विरासत को भी आगे बढ़ा रहे हैं । पुरानी सरकारों द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं को उन्होंने यथावत रखकर, नए मध्यप्रदेश के नवनिर्माण के लिए भारत सरकार के नदी जोड़ो अभियान को क्रियान्वित किया। वहीं पूरे प्रदेश के अलग-अलग संभागों में जाकर क्षेत्रीय इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया ,इसके साथ ही राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का सफलतम् आयोजन कर यह साबित कर दिया कि अब मध्यप्रदेश पीछे मुड़कर नहीं देखेगा बल्कि आगे ही आगे बढ़ते रहेगा और उस ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

निवेश प्राप्त करने से पहले की अवधि में प्रदेश की कानून व्यवस्था,शांतिपूर्ण वातावरण ,सामाजिक समरसता और अधिकारियों के साथ निवेश का तालमेल जैसे विषयों पर गंभीरता के साथ लंबा काम किया गया । यही वजह रही कि इन्वेस्टर्स समिट की संभागों से शुरू हुई यह यात्रा देश के विभिन्न प्रदेशों से होते हुए विदेशों तक जा पहुंची । इससे न सिर्फ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे बल्कि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार भी मिल सकेगा। वास्तव में मोहन सरकार कथनी और करनी को पूरा करके दिखा रही है । उन्होंने लीक से हटकर परिसीमन आयोग का गठन किया इससे तहसीलों, जिलों और संभागों की सीमाओं का युक्ति-युक्तिकरण हो सकेगा और आमजन को जिले और संभाग तक जाने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी ।

वास्तव में इस निर्णय के पीछे की मंशा बहुत ही बड़ी है । वे मध्यप्रदेश के चहुमुखी विकास को आगे बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन नीति पर काम कर रहे हैं। जिसका असर भी दिख रहा है, यदि अकेले उज्जैन की ही बात करें तो उज्जैन की जितनी जनसंख्या है उतने लोग तो हर सप्ताह उज्जैन की धार्मिक यात्रा पर आ रहे हैं। भगवान महाकाल की नगरी में रोजगार और व्यवसाय शिखर छू रहे हैं। उज्जैन नगरी को उसका पुरा वैभव मिल रहा है । जहां मोहन सरकार ने श्री कृष्ण पाथेय के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है वहीं श्री रामपथ गमन में कर्तव्य, शील और आदर्श जीवन की उक्ति को उकेरने का काम आरंभ होने जा रहा है ।

मुख्यमंत्री डॉ यादव के नेतृत्व में प्रदेश न सिर्फ अपनी योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित कर रहा है बल्कि केंद्र सरकार की अनेकों योजनाओं के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है । मोहन सरकार अपने चुनावी संकल्प को पूरा करने को लेकर भी गंभीर है । लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली अब राशि 1250 से 1500 तक पहुंच गई है और यह राशि चुनावी संकल्प के अनुसार बढ़कर ₹3000 तक जाएगी। अभी हाल ही में उन्होंने अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह से कर फिजूल खर्ची और दिखावा न करने का भी स्पष्ट संदेश दिया है। जरा आमंत्रण पत्र की कीमत भी जान लीजिए ,जी हां ! आमंत्रण पत्र की कीमत है ₹12 उसमें भी मुख्यमंत्री नाम का कहीं जिक्र भी नहीं है। लिखा है मोहन यादव और यादव परिवार । शादी तो शादी, सगाई पर भी गौर कीजिए । सगाई में बेटे और बहू किसी महंगी और लग्जरी कार से नहीं बल्कि वह बैलगाड़ी से आए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने निजी जीवन में भी सादगी के कई प्रतिमान स्थापित किए हैं । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनकी पत्नी और बेटे सीएम हाउस में नहीं रहते हैं। एमबीबीएस करने के बाद एमएस कर रहा उनका डॉक्टर बेटा भोपाल में ही हॉस्टल में रहता है वहीं पत्नी पैतृक आवास में ही पूरे परिवार के साथ निवास करती है। वास्तव में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोशल रिफॉर्मर है ।

निजी जीवन से लेकर सामूहिक विवाह समारोह में बेटे का विवाह करने तक उनकी राजनीति सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है, बेजोड़ है। सामूहिक विवाह समारोह से उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया है वास्तव में सरकार का काम सिर्फ सड़क, बिजली, पानी जैसे विकास कार्य करवाना ही नहीं है बल्कि समाज सुधार करना भी है । मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इन दो सालों में जहां असरदार फैसलों और दमदार कामों से मध्यप्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा कर स्वयं को विजनरी मुख्यमंत्री के रूप में साबित किया है वहीं कैबिनेट के वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करते हुए खुद को प्रभावशाली और निर्णय लेने में सक्षम मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रस्तुत किया है। दूसरे प्रदेशों में हुए चुनाव में भी स्टार प्रचारक के रूप में काम करते हुए चुनावी सफलता का संदेश देने में भी उन्होंने जबरदस्त कामयाबी हासिल की है।

अभी हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने 25 सीटों पर प्रचार किया था जिनमें से 21 सीटों पर भाजपा को सफलता मिली है। वे अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक को केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाकर उनका जीवन खुशियों से भरने का काम कर रहे हैं। वास्तव में परिश्रम की पराकाष्ठा का पर्याय बन चुके मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का मुख्यमंत्री के रूप में दो वर्ष का सफलतम् कार्यकाल बेमिसाल रहा है ।