13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ छेडछाड़ करने वाले आरोपी को 03 वर्ष का कठोर कारावास एवं कुल 3,000रू. के जुर्माने से दंडित किया गया।
माननीय अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ छेडछाड़ करने वाले एवं उसे जान से मारने की धमकी देने वाले आरोपी अब्दुल सोहेल पिता अब्दुल बहाब, उम्र-23 वर्ष, निवासी-बैतूल, जिला-बैतूल को धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट समाहित धारा 354 भादवि के अपराध में दोषी पाते हुए 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000रू. का जुर्माना, धारा 11(पअ)/12 पॉक्सो एक्ट के
अपराध में दोषी पाते हुए 01 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5,00रू. का जुर्माना, एवं धारा 323 भादवि में 06 माह के कठोर कारावास एवं 500रू. के जुर्माना से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।
प्रकरण की जानकारी देते हुए अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी अमित राय (एडीपीओ) ने बताया कि पीड़ित 13 वर्षीय बालिका ने दिनांक 08-01-2023 को पुलिस थाना कोतवाली में उपस्थित होकर इस आषय की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवायी की वह कक्षा 10वीं में पढ़ती है। दिनांक 08-01-2023 को रात्रि 08ः00 बजे वह अपनी सहेलियों के साथ मंदिर गई थी। आरती के बाद वह अपनी दोनों सहेलियों के साथ वापस आ रही थी, तभी उसके मोहल्ले का सोहिल अली आया और बुरी नीयत से उसका हाथ पकड़ कर उसे अंधेरे में गली में खींच कर उसके साथ जबरदस्ती
करने लगा। वह चिल्लाने लगी तो आरोपी ने उसे थप्पड़ मार दिया और कहने लगा कि तू चिल्लाई या फिर यह बात किसी को बतायी तो तुझे जान से खतम कर दूंगा। पीड़िता ने आरोपी से जैसे-तैसे अपना हाथ छुडाकर भागते हुए अपने घर आकर उसके भाई-बहनों को घटना के बारे में बताया, जब उसके भाई-बहन आरोपी को समझाने गये तो आरोपी ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दर्ज करवाया कि घटना के पहले भी जब वह घर से अकेली बाहर जाती थी, तो
आरोपी उसका पीछा कर उसे परेषान करता था। पीड़िता की षिकायत पर आरोपी के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गयी। प्रकरण की विवेचक उपनिरीक्षक कविता नागवंषी ने आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया। अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध पाकर दंडित किया गया।







