दिव्यालय एक साहित्यिक पटल पर
*व्यक्तित्व एक परिचय (कर्नल दीपक रामपाल जी)*
दिव्यालय एक साहित्यिक पटल पर प्रति बुधवार दिव्यालय एक व्यक्तित्व परिचय “चंद बातें कुछ यादें नई पुरानी”
इस श्रृंखला के अंतर्गत हुए साक्षात्कार में उपस्थित मेहमान कर्नल दीपक रामपाल जी ने बताया की कैसे सरहद पर तैनात सैनिकों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तब जाकर कहीं हम वतन वासी और वतन शत्रु के बुरी नजर से सलामत रहते हैं ।
अदम्य शौर्य और साहस के प्रतीक कर्नल दीपक रामपाल जी पंजाब राज्य के रहने वाले हैं, इनके पिता जी भी एक साहसी अफसर थे, पारिवारिक पृष्ठभूमि में कड़क अनुशासन और अनुशासित रहते हुए ही, इन्होंने अपनी शिक्षा ग्रहण की, अपने परिवार के बड़े व इकलौते पुत्र होने के बावजूद इन्होंने देश सेवा को चुना, क्योंकि इनकी माता जी के यह शब्द की”अगर हम नहीं भेजेगें अपने बेटे को तो देश की सेवा कौन करेगा “
इन्होंने आ.ई.सी.ए की परीक्षा भी उतीर्ण की मगर पिता के पदचिन्ह पर चलते हुए आलिव वर्दी को चुना,
आप कारगिल युद्ध के चश्मदीद हैं, इन्होंने कई एक ऐसे यादों का जिक्र किया जो रोंगटे खड़े करने वाले थे, जैसे हमारे भारत के संस्कार और गीता पुराण के संदेश भी हमें सदा प्रेरित करते हैं, देश सेवा के लिए,
कितने ही सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, ऐसे में एक सैनिक के पाॅकेट से मिले पिता के पत्र का जिक्र करते हुए बताया “बेटा युद्ध में जा रहे हो जरूर जाओ पर याद रखना गोली सीने पर खाना पीठ पर नहीं”
आ. कर्नल साहब 54 वर्ष की उम्र में रिटायर होने के बाद समर्पित भाव से शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए कार्य कर रहें हैं,उनके हर सुख – दुख मे सम्मिलित होतें हुए बच्चे के शिक्षा – दीक्षा के लिए भी उचित कदम उठाते हैं, किसी विशेष समारोहों में बुलाया जाता है,
कर्नल साहब की जुबानी कारगिल में शहीद शत्रु दल के सैनिकों का भी ससम्मान धर्मानुसार अंतिम संस्कार करवाया जाता है, हमारे देश और हमारे सैनिकों की यह महानता है,
युद्ध में शामिल हर सैनिक के मन में यही ख्याल रहता हम रहे ना रहे पर हमारे हमवतन और हमारे साथी सुरक्षित रहे|
अपने अंतिम संदेश में कर्नल साहब के ये वाक्य मन को छू लेने वाले — देश के लिए अगर रिटायरमेंट के बाद भी मौका मिले तो सौभाग्य होगा, बिना वक्त गवाएं तैनात रहेंगे , क्योंकि एक सैनिक कभी बूढ़ा नहीं होता, वह आजीवन खुद को एक सैनिक ही मानता है|
अगर देश कोई बुरी नजर से देखे तो वो किसी बुलावे का इंतज़ार नहीं करेंगे |
और अंत में बेहतरीन संचालन कर रहे यू.के. से किशोर जैन जी ने अपने इस साक्षात्कार के भाव प्रकट करते हुए अपने अतिथि कर्नल जी को सैल्यूट देते हुए धन्यवाद किया फिर
दिव्यालय की संस्थापक व कार्यक्रम आयोजक व्यंजना मिथ्या दीदी, और अध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक मंजरी निधि जी को मंच पर आमंत्रित कर उनके भाव को प्रकट करने को कहा ।
पूरे दिव्यालय परिवार की तरफ से उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार जताया ।
मीडिया प्रभारी
सुनीता सिंह सरोवर
जय हिंद