युवा पवन जैन हो गए शुभम सागर ,सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर विशुद्ध सागरजी से ली जैनेश्वरी दीक्षा, नम आँखों से हजारों लोग प्रत्यक्षदर्शी बने दीक्षा महोत्सव के
*जितेन्द्र निगम – चिचोली*
*नगर के अहिंसा परिसर बाजार चौक में सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान मे आयोजित भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवे दिन बुधवार 4 जनवरी को विशाल धर्म सभा में उपस्थित हजारों धर्मावलंबियों की मौजूदगी मे संघाधिपति आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी महाराज ने बाल ब्रम्हचारी पवन जैन को दीक्षा देकर दिगम्बर मुनि के रूप मे अपने संघ मे शामिल किया.*

*आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी द्वारा 16 संस्कारो और 28 मूल गुणों का अवतरण करने के उपरांत बाल ब्रम्हचारी पवन जैन का पहले केश लोचन संस्कार हुआ. इसके बाद पवन जैन से वस्त्रों का त्याग करवाकर संपूर्ण विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ जैनेश्वरी की दीक्षा दिलाई. दीक्षा के तत्काल बाद आचार्य श्री ने पवन जैन का नया नामकरण किया. और पवन अब शुभम सागर हो गए.आचार्य विशुद्ध सागर जी ने शुभम सागर को अपने संघ में शामिल होने की अनुमति दी. इसके पूर्व परंपरा के अनुसार आचार्यश्री ने बाल ब्रम्हचारी पवन जैन एवं उनके परिवार से दीक्षा की सहमति ली.*

*चिचोली में जैनेश्वरी दीक्षा लेकर बाल ब्रम्हचारी पवन जैन से दिगम्बर जैन मुनि बने शुभम सागर का जन्म 8 मार्च 1992 को आमला में हुआ . इनका बचपन भीमपुर और चिचोली में अपने नाना नानी के घर बीता. सांसारिक सुख त्यागकर पवन ने कुछ वर्ष तक जैन संतों का सान्निध्य प्राप्त किया. वह बाल ब्रम्हचारी बने रहे और आज अपने परिवार से भावभीनी बिदाई लेकर जैनेश्वरी दीक्षा लेने के बाद दिगम्बर जैन मुनि बन गए. नए नाम शुभम सागर के साथ वह तन मन और आत्मन गुरू के चरणों मे अर्पित करते हुए आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी महाराज के ससंघ में शामिल होकर आध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर हो गए.*
*हजारों लोग पवन की दीक्षा के प्रत्यक्षदर्शी बने*

*नगर के अहिंसा चौक पर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव मे प्रतिदिन सैकड़ों श्रृद्धालु आचार्य श्री के प्रवचन सुनने के लिए उपस्थित हो रहे हैं लेकिन आज पवन जैन के दीक्षा महोत्सव के अवसर पर हजारों लोग दीक्षा कार्यक्रम के प्रत्यक्षदर्शी बने. कार्यक्रम के दौरान दूर दराज से आए जैन धर्मावलंबियों के अलावा बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों के लोग भी शामिल हुए . सभी लोगों ने नम आंखों से ब्रह्मचारी पवन के दीक्षा समारोह को देखा. कार्यक्रम स्थल पर महिलाओं के नेत्रों से लगातार अश्रुधारा बहती रही.*







