जीवन को आभूषण नही सद्गुणों से संवारो – “पंडित तिवारी

*जीवन को आभूषण नही सद्गुणों से संवारो – “पंडित तिवारी”*

*आत्मशुद्धि का साधन है सत्संग*

*लकवा हनुमान मंदिर की कथा मे सैकड़ों श्रोताओं के बीच पहुंचे विधायक पंडाग्रे एवं जनप्रतिनिधि*

*जितेन्द्र निगम – चिचोली*

*तहसील मुख्यालय से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध लकवा हनुमान मंदिर के ग्राम मंडई में चल रहे सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के भव्य सत्संग आयोजन के छटवे दिन गुरूवार की कथा सुनाते हुए संत भक्त पंडित भगवती प्रसाद तिवारी ने धर्म पंडाल मे बड़ी संख्या में मौजूद लोगों को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के आचार्य महामुनि सतगुरु श्री शुकदेवजी महाराज ने राजा परीक्षित को समझाते हुए बताया था कि मनुष्य को जीवन किसलिए मिला है ? उसे क्या करना चाहिए ? मनुष्य के जनम और मरण के क्या कारण है ? इन सब प्रश्नों के उत्तर उसे सत्संग से ही मिलते हैं . सच्चा संत,सतगुरू मनुष्य को सावधान करने के लिए ही सत्संग सुनाते हैं . जीवन में सावधान रहना ही साधना है. पाप,शराब,मांसाहार, झूठ,चोरी,मिलावट,रिश्वत,अनीति, अन्याय से सदा सावधान रहो ,इस जीवन में एक बार भी नशा,चोरी, मांसाहार, अत्याचार नहीं करना चाहिए . शिष्य की श्रद्धा,भावना तो सच्ची होती है लेकिन गुरु सच्चा नही होता तो कल्याण नही होता है.*
*कथा वाचक पंडित भगवती प्रसाद तिवारी ने बताया कि हम सभी को प्रतिदिन समय निकाल कर अपने धर्म ग्रंथों को अवश्य ही पढ़ना,समझना चाहिए . उन्होने बताया कि नर नारी के श्रंगार मे सत्कर्मों का कपड़ा ,होंठों पे सच्चाई हो, आंखों में दया हो, हाथों मे सेवा दान ,चेहरे पर मुस्कराहट ,हृदय में प्रेम होना चाहिए. मनुष्य के पांव हमेशा परोपकार,परमार्थ,धर्म के रास्ते पर चलने चाहिए. अपने जीवन को इसी तरह सद्गुणों से सजाना,संवारना चाहिए. चाहे किसी से डरो या ना डरो मगर पाप करने से डरना चाहिए. कमाने के लिए मत जिओ बल्कि जीने के लिए कमाना चाहिए. सच्ची भक्ति, साधना, जप,तप करने वाला कभी पाप नहीं कर सकता.*

*कथा वाचक पंडित भगवती प्रसाद तिवारी ने कहा कि इस युग में”वक्त”और”वक्ता”दोनों हीं व्यक्ति,परिवार और समाज के सुधारक है् . इसमे फर्क सिर्फ इतना हैं कि वक्ता अपने विचारों से पहले ही सतर्क कर देता है और वक्त ठोकर लगने के बाद व्यक्ति को सजग करता हैं. मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए. चाहे शराब का हो या धन का हो या रूतबे का हो,नशा ही नाश की जड़ है. उन्होंने आगे कहा कि मन की हलचल और मन की अशांति को दूर करने के लिए मनुष्य के मन की आत्म शुध्दि जरूरी है और आत्म शुध्दि के लिए सत्संग जरूरी हैं और सत्संग के लिए सच्चे गुरु की आवश्यकता होती हैं. ईश्वर मनुष्य को गलत काम करने से रोकता जरूर हैं फिर भी वह बुरे काम करता हैं. गुरूवार की कथा में श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह भी मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ.*
*चिचोली के समीप मंडई ग्राम में चल रहे श्रीमदभागवत के भव्य सत्संग मे छटवे दिन गुरूवार को कथा श्रवण करने आमला विधायक डाक्टर योगेश पंडाग्रे,घोड़ाडोंगरी के पूर्व विधायक व जिला पंचायत सदस्य मंगलसिंग धुर्वे,रेडक्रास सोसायटी अध्यक्ष जयसिंहपुरे के अलावा बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे . कथा सत्संग का शुक्रवार को अंतिम दिन है . शुक्रवार को सुबह 11 बजे से अंतिम दिन की कथा श्रवण कराई जाएगी. पश्चात आरती फिर भोजन प्रसादी का विशाल भंडारा होगा.*