पाथाखेड़ा मैं उज्जवल है कोयले का भविष्य सोमेंद्र कुंडु एरिया महाप्रबंधक,शुरू हुआ होगा कंटीन्यूअस माइनर से उत्पादन

पाथाखेड़ा । देश में कोयले का भविष्य लंबा है। ओपन कास्ट माइन निश्चित समय ही कोयला उत्पादन करेगी। लेकिन अंडर ग्राउंड माइन लंबे समय तक कोयला उत्पादन कर देश के निर्माण में अपना योगदान देती है। बिना भूमिगत खदान के देश कोयला उत्पादन में अग्रणी नहीं बन सकता। यह विचार भारतीय मजदूर संघ के पूर्व कोल प्रभारी व वरिष्ठ नेता डॉक्टर बसंत कुमार राय ने छतरपुर-वन खदान में व्यक्त किए। गुरुवार को पाथाखेड़ा क्षेत्र की छतरपुर खदान में कोयला सचिव अनिल जैन कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल डब्ल्यूसीएल सीएमडी मनोज कुमार द्वारा वर्चुअल कंटीन्यूअस माइनर का शुभारंभ किया इस मौके पर छतरपुर वन खदान में बतौर अतिथि के रुप में उपस्थित भारतीय मजदूर संघ के पूर्व कुल प्रभारी डॉक्टर बसंत कुमार राय ने कहा ओपन कास्ट माइन क्वांटिटी देती है, लेकिन अंडर ग्राउंड माइंड क्वालिटी देती है। इसलिए बिना भूमिगत खदान से कोयला उत्पादन लिए देश कोयला उत्पादन में अग्रणी नहीं बन सकता। माइनिंग इंजीनियरों को कोयला उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित मशीन निर्माण पर तैयारी करने की जरूरत है। इसी सोच के साथ भारत कोयला उत्पादन में दुनिया के देशों में अग्रणी बन सकता है। डॉ राय ने कहा हम आज भी कोयला उत्पादन के लिए चाइना, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की मशीनों पर निर्भर है। जबकि हमारे पास एक से बढ़कर एक इंजीनियर है। लेकिन आत्मनिर्भर भारत की ओर कोई सोच ही नहीं रख रहा।
376 करोड़ के घाटे में चल रहा है पाथाखेड़ा क्षेत्र
पाथाखेड़ा महाप्रबंधक सौमेन्दू कुंडू ने कहा 2029-30 तक पाथाखेड़ा क्षेत्र में 8 कंटीन्यूअस माइनर लग जाएगी। साथ ही पाथाखेड़ा क्षेत्र से 30 लाख मैट्रिक टन से अधिक कोयला उत्पादन शुरू हो जाएगा। 3000000 टन कोयला उत्पादन करते ही पाथाखेड़ा क्षेत्र घाटे से उभर जाएगा। बीते साल पाथाखेड़ा क्षेत्र की खदानों से 11 लाख मैट्रिक टन कोयला उत्पादन हुआ था। तब पाथाखेड़ा क्षेत्र 376 करोड रुपए के घाटे में था। इस साल 13 लाख मैट्रिक टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य। इस लक्ष्य को पूर्ण करते ही घाटा घटकर 250 करोड़ पर आ पहुंचेगा। साल 23-24 में 16 लाख मैट्रिक टन
कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करते ही पाथाखेड़ा क्षेत्र का घाटा 200 करोड़ के आसपास आ पहुंचेगा। पाथाखेड़ा महाप्रबंधक ने कहा छतरपुर वन खदान से मौजूदा स्थिति में 950 टन कोयला उत्पादन होता है। कंटीन्यूअस माइनर से उत्पादन शुरू होते ही कोयला उत्पादन बढ़कर 2100 मेट्रिक टन के आसपास जा पहुंचेगा। महाप्रबंधक ने बताया छतरपुर वन खदान में जॉय माइनिंग सर्विसेज द्वारा कंटीन्यूअस माइनर लगाई जा रही है। इस कंपनी के द्वारा कोल इंडिया कि कई खदानों से कोयला उत्पादन लिया जा रहा है। पाथाखेड़ा क्षेत्र में जॉय माइनिंग सर्विसेज का यह 20वां प्रोजेक्ट है।
देश मे लंबा है कोयले का भविष्य –
वर्चुअल उद्घाटन कार्यक्रम में कोल इंडिया सचिव अनिल जैन, कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कोयले का भविष्य लंबा है। इसीलिए गुणवत्तापूर्ण कोयला उत्पादन के लिए भूमिगत खदान जरूरी है। इस मौके पर रणधीर सिन्हा, तवा-2 के सब एरिया संजीवा रेड्डी,तवा 1 सबएरिया एम सत्यनारायण छतरपुर-1 के सब एरिया राव, एरिया पर्सनल मैनेजर जितेंद्र प्रसाद, दिवाकर लोनहारे, यूनियन प्रतिनिधियों में जगदीश डिगरसे, श्रीकांत चौधरी, प्रमोद सिंह, अशोक बुंदेला, भरत सिंह, गोकुल गोहे, महेंद्र यादव, अशोक मालवीय ,जितेन्द्र , हबीब अंसारी निरापुरे ,जगदीश रघुवंशी
कैलाश चौकीकर, अशोक सेन गुप्ता,सहित सभी विभागों के प्रमुख समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी उपस्थित रहे।