शहीदों की याद में जलेंगे कृतज्ञता के दीप शहीद भवन और स्मारक पर आज और कल भी जलाएं जाएंगे मिट्टी के दिए
बैतूल। दीपावली पर्व पर आमतौर पर घरों, दुकानों के सामने दीए जलाए जाते हैं, लेकिन बैतूल में शहीदों की याद और बॉर्डर पर तैनात जवानों के उत्साह वर्धन के लिए 11 वर्षो से कृतज्ञता के दीप जलाएं जा रहे है।
सामाजिक कार्यों में अग्रणी बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की एक छोटी सी पहल अब परंपरा सी बन गई है, जो घर से निकलकर शहीद स्तंभ तक पहुंच गई। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी समिति द्वारा छोटी दीपावली एवं दीपावली महापर्व पर शहीद भवन एवं शहीद स्मारक पर सरहद पर तैनात सैनिकों के उत्साह वर्धन और शहीद हुए सैनिकों की याद में कृतज्ञता के दीए आज और कल शाम 6 बजे जलाएं जाएंगे।
समिति के अनुसार इन दीयों के माध्यम से सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, वे त्योहार, बारिश, धूप में सरहद पर तैनात होकर हमारी और पूरे देश की रक्षा करते हैं।
शहीद भवन पर दीप जलाने की परम्परा ऐसे हुई शुरु
बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को राखी बांधने समेत सैनिकों से जुड़ी गतिविधियों व कार्यक्रमों का आयोजन करती है। यह समिति 1999 में हुए कारगिल विजय के बाद ही अस्तित्व में आई।
इस युद्ध में बैतूल के जवान भी शहीद हुए थे। जब यह युद्ध जीता गया, तो सैनिकों की हौसला अफजाई और उनके स मान की शुरूआत हुई। इस पहल के तहत समिति ने राष्ट्र रक्षा मिशन के तहत सरहदों पर रक्षा बंधन मनाने की शुरुआत हुई।
समिति की संस्थापक एवं अध्यक्ष गौरी बालापुरे पदम ने धनतेरस और दीपावली पर घर पर एक दीया शहीदों के नाम से जलाने की पहल की। समिति में सदस्य जुडऩे के साथ-साथ यह पहल अब परंपरा का रूप ले चुकी है। अब घर की जगह बैतूल के शहीद भवन के पास स्थित शहीद स्तंभ पर दीए जलाए जाते हैं।
शहीद भवन पर प्रतिवर्ष दीपावली के एक दिन पूर्व और दीपावली पर दीप जलाने के कार्यक्रम के चलते नगर पालिका द्वारा सुबह भवन व विजय स्तम्भ की सफाई और धुलाई कर तैयारी की है। समिति ने इस हेतु नगर पालिका का आभार माना है व सभी शहर वासियों से कृतज्ञता के दीप जलाने शहीद भवन पहुंचने की अपील की है।