सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत इकाई के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश

सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत इकाई के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर कमर्शियल मिलिंद भान्दक्कर ने सारनी पहुंचकर परियोजना के निर्माण कार्यों का स्थल निरीक्षण किया और अधिकारियों तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ कार्य प्रगति की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना के मुख्य निर्माण स्थल पर चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति देखी। इस दौरान कार्यपालक निदेशक (इंजीनियरिंग) श्री वी.के. कैलासिया, मुख्य अभियंता (परियोजना उत्पादन) श्री आर.के. खरे सहित मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के मुख्य अभियंता श्री सुशील लिल्होरे और प्रोजेक्ट एक्सपर्ट एस.एन. सिंह ने परियोजना के निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी।

बीएचईएल और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा – स्थल निरीक्षण के बाद डायरेक्टर कमर्शियल ने ईपीसी ठेकेदार भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के प्रतिनिधियों और विद्युत गृह के विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक की। इसमें परियोजना के अब तक के कार्यों की प्रगति, आगामी कार्य योजना और निर्माण के दौरान सामने आ रही तकनीकी, इंजीनियरिंग तथा लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की गई। बैठक में निर्माण कार्यों से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, कार्यों की प्राथमिकता और लंबित गतिविधियों की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने परियोजना के महत्वपूर्ण कार्यों को तय समय के अनुसार आगे बढ़ाने और निर्माण प्रक्रिया में आ रही बाधाओं का शीघ्र निराकरण करने पर जोर दिया। साथ ही, कार्यपालक निदेशक (इंजीनियरिंग) श्री वी.के. कैलासिया ने परियोजना से जुड़े इंजीनियरिंग पहलुओं की जानकारी दी, जबकि मुख्य अभियंता (परियोजना उत्पादन) आर.के. खरे ने आगामी कार्यों और निर्धारित समय-सीमा की जानकारी प्रस्तुत की।

समय पर पूरा करने पर जोर – डायरेक्टर कमर्शियल श्री मिलिंद भान्दक्कर ने कहा कि 660 मेगावाट की यह सुपरक्रिटिकल इकाई प्रदेश की आगामी ऊर्जा जरूरतों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीएचईएल और सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्यों की नियमित निगरानी और सामने आ रही तकनीकी एवं अन्य बाधाओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने को कहा, ताकि परियोजना निर्धारित समय-सीमा में पूरी हो और इकाई को समय पर ग्रिड से जोड़ा जा सके।

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