बैतूल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर क्या लगेगी रोक ❓ जबलपुर जिला प्रशासन की कार्यवाही जनता के बीच चर्चा का केंद्र बनी
पिछले वर्ष देखा गया कि आधा शिक्षा सत्र बीत जाने के बाद जब प्रशासन ऐसे बिना परमिशन से संचालित हो रहे स्कूलों पर कार्रवाई करता है तो पालक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं
लोग जिला प्रशासन की ओर देख रहे हैं कि हमारे जिले का भी प्रशासन जिले के निजी स्कूलों की मनमानियां पर कब अंकुश लगाएगा
प्रदेश के जबलपुर जिले में जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों पर कार्यवाही कर निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की प्रभावी पहल की है। जबलपुर में जिला कलेक्टर द्वारा की गई प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया गया कि निजी स्कूल मनमाने ढंग से बिना प्रशासकीय अनुमति के अपनी मनमर्जी से स्कूलों की फीस बढ़ाते हैं। वही स्टेशनरी स्कूल ड्रेस सहित अन्य सामग्री निश्चित दुकानों से ही लेने के लिए पालकों को कहा जाता है। निजी स्कूलों पर जबलपुर जिला प्रशासन की कार्रवाई कि पूरे प्रदेश में तारीफ हो रही है ।चौक चौराहों पर यह चर्चा सरगर्म है कि ऐसा तो हमारे यहां भी हो रहा है। फिर हमारे यहां का जिला प्रशासन कब कार्रवाई करेगा ।
पिछले सत्र में ही देखा गया कि घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में कई निजी स्कूल बिना परमिशन के भी चलते हुए पाए गए और उन पर कार्यवाही भी की गई। लोगों में चर्चा है कि बैतूल जिले में और घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में भी निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस की बढ़ोतरी करते हैं। कई बेवजह की फीस भी पालकों से लेकर शिक्षा के नाम पर पालकों का शोषण होता है ।स्कूलों में बेवजह की पुस्तके चलाई जाती हैं और ऐसे ऐसे प्रकाशन की पुस्तक स्कूल प्रबंधन ढूंढ कर लाता है जो ढूंढने से भी नहीं मिलती और पालकों स्कूलों द्वारा जिन गिनी चुनी दुकानों पर पुस्तक रखी जाती है वहां से खरीदने पर मजबूर होते हैं।
शासन द्वारा सभी कक्षाओं के लिए बस्ते का बोझ निर्धारित किया गया है। उसके बावजूद निजी स्कूल बच्चों के बस्ते का बोझ कम करना ही नहीं चाहते और तरह-तरह के मापदंड अपनाकर शासन के नियमों को धता बताने में लगे हुए हैं। बस्ते का बोझ मतलब बच्चों पर पढ़ाई का एक निश्चित किताबें होना चाहिए । लेकिन स्कूल प्रशासन की बोझ तो कम नहीं करता और किताबों को खरीदने पर पालकों को कहा जाता है और कई तरह की पुस्तक तो स्कूल में ही रख लेता है दिखावे के लिए नियमों का पालन हो रहा है ।
जबलपुर जिला प्रशासन की कार्यवाही के बाद निजी स्कूलों की मनमानी की चर्चा है चौक चौराहों पर लोगों के बीच आपसी चर्चा का प्रमुख केंद्र बनकर रह गई हैं । लोग जिला प्रशासन की ओर देख रहे हैं कि हमारे जिले का भी प्रशासन जिले के निजी स्कूलों की मनमानियां पर कब अंकुश लगाएगा। जिले में जो मान्यता प्राप्त स्कूल हैं उनकी सूची जारी करेगा ताकि पालकों को पता चले की कौन सा स्कूल ऐसा है जो बिना मान्यता के संचालित हो रहा है और ऐसे स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन नहीं कराये।
पिछले वर्ष देखा गया कि आधा शिक्षा सत्र बीत जाने के बाद जब प्रशासन ऐसे बिना परमिशन से संचालित हो रहे स्कूलों पर कार्रवाई करता है तो पालक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं ।लोगों का मानना है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पहले ऐसे निजी स्कूलों की सूची जारी करना चाहिए जो मान्यता प्राप्त हैं और इन स्कूलों में बच्चों के लिए कैसी किताबें और ड्रेस सहित अन्य सामग्री मनचाही दुकानों से खरीदने के लिए पालकों को मजबूर तो नहीं किया जा रहा इस पर भी स्कूलों का निरीक्षण कर ऐसी मनमानियां पर अंकुश लगाना चाहिए।







