कलयुगी मामा को आजीवन कारावास

 

09 वर्षीय नाबालिक बालिका का बलात्कार करने वाले आरोपी मामा को आजीवन कारावास एवं कुल 10,000रू के जुर्माने से दंडित किया गया।

माननीय अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने 09 वर्षीय नाबालिग बालिका का बलात्कार करने वाले आरोपी सहदेव उर्फ रमेश पिता दिनेष सेन्टुस्से, उम्र-21 वर्ष, निवासी-थाना गंज, जिला-बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 376(एबी) भादवि समाहित धारा 5(एम)/6, 5(एन)/6, पॉक्सो एक्ट, धारा 376(2)(एफ) भादवि में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं 10,000रू. जुर्माने से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विशेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाश सूर्यवंशी द्वारा पैरवी की गई।

प्रकरण की जानकारी देते हुए अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी अमित राय (एडीपीओ) ने बताया कि पीड़िता की मां ने थाना गंज में आकर इस आषय की रिपोर्ट लेख करायी कि वह अपने पति से अलग अपने मायके में बने घर के खेत के पीछे बनी झोपड़ी में रहती है, उसके दो भाई भी है, जो उसके माता-पिता के साथ ही रहते है। दिनांक 01-07-2022 के करीब 10ः30 बजे उसकी बड़ी बेटी घर के बाजू वाली आन्टी के घर गयी थी, उसके माता-पिता और बड़ा भाई घर पर नहीं थे, घर पर वह और पीड़िता थी तथा बाहर बाजे बजने की आवाज आयी और वह घर के बाहर आयी और थोड़ी देर बाद वह नहाने चली गयी। करीबन

10-15 मिनट बाद उसे उसके भाई सहदेव के घर से पीड़िता के चिल्लाने की आवाज आयी, तो वह भाई के घर गयी, तब पीड़िता बाहर दौड़कर आयी और बोली की मामा ने उसके साथ गलत काम (बलात्कार) किया। उसके बाद वह उसके भाई पर चिल्लाई और पीड़िता को ऐसी हालत में देखकर घबरा गयी। घटना के आरे में उसने अपने माता-पिता को बताया। इसके बाद पीड़िता की मां पीड़िता को अपने साथ लेकर पुलिस थाना गंज पहुंची, जहां पर पीड़िता की मां की षिकायत के आधार पर पुलिस थाना

गंज में अभियुक्त सहदेव उर्फ रमेष के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गयी। विवेचना के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया था, आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस थाना गंज द्वारा आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण में अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया, जिसके आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध पाकर दंडित किया गया।