अनुसूचित जनजाति की अवयस्क बालिका का अपहरण कर उसके साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास एवं कुल 13,000रू के जुर्माने से दंडित किया गया।
माननीय अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने अनुसूचित जनजाति की अवयस्क बालिका का
अपहरण कर उसके साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी नितिन सिनोटिया पिता गुलाब सिनोटिया, उम्र-30 वर्ष, निवासी-थाना रानीपुर, जिला-बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 5(जे)(पप)/6 पॉक्सो एक्ट समाविष्ट धारा 376(2)(एन) भादवि में दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5,000रू. जुर्माना, धारा 3(2)(अ) एससी/एसटी एक्ट में दोषी पाते हुए आजीवन करावास एवं 5,000रू. जुर्माना, धारा 366
भादवि में दोषी पाते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000रू. के जुर्माना, धारा 366 भादवि में दोषी पाते हुए 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1,000रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।
प्रकरण की जानकारी देते हुए अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी अमित राय (एडीपीओ) ने बताया कि अवयस्क पीड़िता के पिता ने पुलिस थाना रानीपुर में उपस्थित होकर इस आषय की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवायी कि उसकी बड़ी बेटी दिनांक 23-07-2019 को सुबह 11ः00 बजे स्कूल जाने का कहकर गयी थी, जो वापस घर नहीं आयी है, उसने पीड़िता की आसपास एवं
रिष्तेदारी में काफी तलाष किया, किंतु पीड़िता का कुछ पता नहीं चला है। पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर पीड़िता के गुम होने के संबंध में पुलिस थाना रानीपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर प्रकरण का अनुसंधान आरंभ किया गया। दिनांक 20-10-2019 को पीड़िता को दस्तयाब किया गया, पूछताछ करने पर पीड़िता ने बताया कि आरोपी नितिन उसे जबरदस्ती बुदनी लेकर गया था, जहां पर उसने अपने साथ रखा था और उसके साथ कई बार जबरदस्ती गलत काम (बलात्कार) किया था। विवेचना के
दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया था, आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस थाना रानीपुर द्वारा आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण में अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया, जिसके आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध पाकर दंडित किया गया।







