रामरख्यानी स्टेडियम में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाए जाने से लोगों में भारी आक्रोश

सारनी। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी द्वारा पावर प्लांट के अधिकारियों ने रामरख्यानी स्टेडियम में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाए जाने से लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिली है। क्षेत्र में कई वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़ने का कार्य किया है। शुक्रवार को सुबह 11:00 बजे से जय स्तंभ चौक पर युवा संघर्ष मंच सहित अन्य सामाजिक संगठन के लोगों ने सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के खिलाफ युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय पर्व के प्रति संवेदनहीन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री एवं जबलपुर मुख्यालय से की है। दूसरी तरफ 26 जनवरी का पर्व स्टेडियम में नहीं मनाना और विद्युत गृह द्वारा सतपुड़ा प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करना दोहरी मानसिकता दर्शाता है।

जय स्तंभ चौक पर इकट्ठा हुए युवा संघर्ष मंच के शिवाजी सुने, अशोक पचोरिया ने कहा कि स्टेडियम में 26 जनवरी का पर्व पावर प्लांट के अधिकारियों द्वारा नहीं मना कर उजड़ते शहर से लोगों की छात्र-छात्राओं और लोगों की खुशियों के पल छीनने का काम किया है ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। स्टेडियम में 26 जनवरी का पर्व नहीं मनाए जाने से पूरे शहर में मातम जैसा महसूस किया गया। इसी तरह अखिलेश तिवारी, राकेश महाले, विजय पढ़लक, मोहम्मद इलियास ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर गांव गली मोहल्ले में राष्ट्रीय पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया लेकिन सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के अधिकारियों ने कोरोना का हवाला देकर इस पर्व को नहीं मना कर घोर लापरवाही दिखाई है। ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए। इस मौके पर मुन्नालाल कापसे, राकेश नामदेव, उमेश विश्वकर्मा, अख्तर खान, पंचू खान, दीनदयाल गुर्जर, सुदेश तिवारी, संजू कोली, राजेश राठौर, अय्यूब मंसूरी, दीपक सुने सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

कर्मचारी व अधिकारी संगठन ने नहीं ली रुचि

सतपुड़ा पावर प्लांट में कर्मचारी अधिकारी संगठनों के लोगों को पहले से ही पता लग गया था, कि 26 जनवरी का पर्व रामरख्यानी स्टेडियम में नहीं मनाया जाएगा। इसको लेकर किसी भी संगठन के द्वारा और प्लांट प्रबंधन से समय रहते हुए मुलाकात नहीं करना इन संगठनों की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठता है। वह सिर्फ अपने स्वहित साधने में लगे रहते हैं और जनहित के मुद्दे पर दिखाई नहीं देते। इन लोगों की वजह से शहर पूरी तरह से उजड़ गया है।

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