Ghoradongri : घोड़ाडोंगरी में डिलिस्टिंग रैली को सफल बनाने के लिए सभी जनजाति प्रतिनिधियों को बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं-संजीव रॉय(जनजाति हितरक्षा प्रान्त टोली सदस्य)

जनजाति समाज की हुंकार! धर्मांतरित आदिवासी से वापस लेंगे सारे अधिकार एवं आरक्षण को लेकर एकजुट आदिवासी समाज।
घोड़ाडोंगरी विकास खंड के इतिहास में पहली बार हजारो की संख्या मे आदीवासीयो ने धर्मांतरण के विरोध में एकत्रित होकर नगर में रैली निकाली और धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूचि से बाहर करने का अहवाहन सरकार से किया और इसके लिए चाहे आदिवासी समाज को भले ही किसी भी हद तक जाना पड़े अब पीछे नही हटने का संकल्प आदिवासीयो द्वारा लिया गया। घोड़ाडोंगरी में हजारो की संख्या मे आदिवासी समाज इक्ठा हुआ और विषाल रैली निकाली,इस सफल कार्यक्रम के आयोजन में घोड़ाडोंगरी विकास खण्ड संयोजक अरविंद धुर्वे,जनजाति हितरक्षा आयाम प्रांतीय सदस्य संजीव रॉय,जिला संगठन मंत्री श्याम ठाकरे,विकासखंड संरक्षक रामजीलाल उइके,सह संयोजक ज्ञान सिंग,महिला प्रमुख शनवती कबड़े,घोड़ाडोंगरी सेक्टर संयोजक नरेंद्र उइके,सह संयोजके गोविंद पेंद्रम,पाढर संयोजक रेवा राम,सह संयोजक संजू धुर्वे,शक्तिगड संयोजक राधेश्याम उइके,सह संयोजक रामजी लवेसकर,चोपना संयोजक अशोक नवरे,सह संयोजक नन्दकिशोर ,हीरापुर संयोजक भगवती अखण्डे,रानीपुर संयोजक उज्जल मवासे,संरक्षक मदन आहाके,जिला ग्राम विकास प्रमुख बिजालाल धुर्वे, विकास खण्ड टोली सदस्य मनोज धुर्वे,शंभूलाल,सरबनजी सरपंच,निशा धुर्वे,संजय धुर्वे ने लगातार ग्राम ग्राम में जनसम्पर्क किया और गांव गांव में बैठक करके रैली में आने के लिए प्रेरित किया जिसका सार्थक परिणाम सफल रैली के रूप में पहली बार घोड़ाडोंगरी के इतिहास में हजारों की संख्या में जनजाति समाज मे हिस्सा लिया। रैली के पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यवक्ता के रूप मे श्री डॉ महेंद्र सिंह चौहान, कैलाश निनामा, कालू सिंह मुजाल्दा उपस्थित थे क्रमशः गोंडी, कोरकू एवं हिंदी भाषा में कहा गया कि धर्मांतरण से हमारी संस्कृति को तो खतरा है ही साथ ही इससे हमारे बच्चों का हक भी मारा जा रहा है। अपनी संस्कृति, आस्था, परंपरा को त्याग कर ईसाई या मुसलमान बन चुके लोग 80 प्रतिशत लाभ जनजाति समुदाय से छीन रहे हैं। धर्मांतरित होकर लोग दोहरा फायदा उठा रहे हैं। ऐसे सभी लोगों को जनजाति की सूची से हटाने की मांग को लेकर स्वर्गीय कार्तिक उरांव ने पहली बार 1966- 67 में 235 सांसदों के हस्ताक्षर से युक्त ज्ञापन तत्कालीन प्रधानमंत्री को दिया था। श्री उरांव ने पुन इस मुद्दे को 1970 में उठाया। उस समय 348 सांसदों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। किंतु इतने प्रबल समर्थन के बाद भी इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच इस मांग को लेकर लगातार पूरे देश में जनजागरण अभियान चला रहा है। सुरक्षा मंच ने पूर्व में भी सन 2009 में देशभर से 28 लाख लोगों का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल को सौंपा था, लेकिन तब भी इस समस्या के निदान हेतु कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसका मुख्य कारण था कि उस समय जनता अपने हक के लिए जागरुक नहीं थी, लेकिन आज जनजाति सुरक्षा मंच लोगों में चेतना लाने के लिए समाज के लोगों को प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री कालुसिंह मुजाल्दा , श्री कैलाश निनामा (मध्य भारत जनजाति सुरक्षा मंच संयोजक )डॉ महेंद्र सिंह चौहान जनजाति सुरक्षा मंच जिला संयोजक बेतूल, श्री छोटु सिंह उइके (बैतुल जिला स – हसंयोजक ) अरविंद धुर्वे घोड़ाडोंगरी विकासखंड संयोजक एवं समाज के भूमका इंदल भागत, भूमका गन्नू भगत, भूमका मदन चौहान, भूमका आजूलाल परते, भूमका सुरजु उइके, भूमका किरण उइके मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में जनजाति समाज के जनप्रतिनिधियो ने जमकर समर्थन एवं सहयोग प्रदान किया सभी जनजाति समाज के भाइयों बहनों एवं जनप्रतिनिधियो को तह दिल से आभार व्यक्त करता हु एवं इस लड़ाई को आगे जारी रखने की अपील करता हूं। धरती दाई न सेवा सेवा।

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