लोभ व्यक्ति के सारे गुणों को नष्ट कर देता है श्री राजेश जी बरेली
लोभ पाप का बखाना , शुचिता धर्म है . 0४-०९ • युवा विद्वान बाल ब्रह्मचारी श्री राजेश जी बरेली . शुचिता , पवित्रता का नाम शौच धर्म है । अपना आत्मा काम , क्रोध , मोह , लोभ आदि विकारों से अपवित्र हो रहा है , यही अशुचिता अधर्म है , जो मनुष्य के…
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