मन से कुछ सोचना , वचन से कुछ और कहना तथा शरीर से कुछ और ही करना , इसी कुटिलता को मायाचार कहते हैं…
कच्ची हंडी काठ की चढ़े न दूजी बार .. - युवा विद्वान बाल ब्रह्मचारी श्री राजेश जो बरेली . छल कपट करना , विश्वास घात करना माया कषाय का लक्षण है । मन , वचन , काय की कुटिल परिणति को मायाचार कहते हैं , यह माया कषाय आर्जव रूप सरलता गुण को…
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