युगप्रवर्तक डाक्टर हेडगेवार महानाट्य का हुआ सफल मंचन— संस्कार भारती

सारनी — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संघ शताब्दी वर्ष में जयवंती हाक्सर महाविद्यालय बैतूल के अटल सभागार में आयोजित युगप्रवर्तक डाक्टर हेडगेवार महानाट्य का सफल मंचन हुआ। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग भोपाल के द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक युगप्रवर्तक डाक्टर हेडगेवार संघ सृजन का भव्य नाट्य अविष्कार महानाट्य का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बुधपाल काकोडिया माननीय जिला

संघचालक बैतूल, मुकेश खंडेलवाल सचिव भारत भारती शिक्षा समिती . सुधाकर पवार जिलाध्यक्ष भाजपा बैतूल, एस एन सिंह सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सतपुड़ा ताप विद्युत गृह ,नादबह्म संस्था नागपुर के रविन्द्र सहस्त्रबुध्दे सहित अनेक गण मान्य नागरिक उपस्थित हुए। उक्त जानकारी संस्कार भारती मध्य भारत प्रांत के प्रांतीय महामंत्री मोतीलाल कुशवाह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी। युगप्रवर्तक डाक्टर हेडगेवार महानाट्य के निर्माता पद्माकर धानोरकर लेखक अजय प्रधान ने इस महानाट्य को सजीव रूप दिया। नादबह्म नागपुर द्वारा निर्मित भव्य महानाट्य में महात्मा गांधी से डाक्टर हेडगेवार जी की भेंट। लोक मान्य तिलक से विचार विमर्श और महर्षि अरविंद से विस्तार से कांग्रेस और महात्मा गांधी की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के साथ ही कांग्रेस

अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव नही रखे जाने का से डाक्टर हेडगेवार चिन्तित थे। उन्हें हिन्दू समाज के संगठन की चिंता थी। डाक्टर हेडगेवार में जो ऊर्जा है वह इस देश को चारित्र्य बल प्रदान कर सकती है। स्वातंत्र्य वीर सावरकर से मिलने के बाद हेडगेवार के मन में चल रही उथल को विराम लगा। कांग्रेस की विचार धारा भटक गई है। मोपला में 20 हजार हिन्दूओं की हत्या की गई। गांधी जी चुप रहे। डाक्टर हेडगेवार ने तिलक जी से पुनः भेंट की । स्वराज्य मेंरा जन्म सिद्ध अधिकार है मैं इसे लेकर रहुंगा तिलकजी ने देश से आव्हान किया। हमें स्वतन्त्रता प्राप्त होगी। यह देश वर्षो से गुलाम रहा है। हेडगेवार जी में संगठन क्षमता है और जो संगठन बनाएगें सभी अनुशासित

रह कर समाज के लिए कार्य करते रहेगें। अंत में एक ऐसे संगठन की स्थापना की गई जो राष्ट्र को समर्पित होकर समाज के लिए काम करे। 27 सितम्बर 1925 विजयादशमी के दिन नागपुर के मोहिते के बाडे में संघ की स्थापना हुई। नेताजी सुभाषचंद्र बोस , डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी डाक्टर हेडगेवार से मिलने नागपुर आये। अंत में डाक्टर हेडगेवार जी का स्वास्थ्य धीरे धीरे खराब होने लगा। हेडगेवार जी ने अपने अंतिम उदबोधन मे माधवराव और गोलवळकर जी को संघ की बागडोर सौंपी। नादबह्म नागपुर द्वारा निर्मित महानाट्य में डाक्टर हेडगेवार जी की भूमिका सतीश खेडाले, गुरू जी की भूमिका में अमोल

तेलपांडे, गाधी जी की भूमिका प्रशांत मांगडे और लोक मान्य नागरिक की भूमिका में मंगेश बावसे नें बहुत ही प्रशंसनीय अभिनय कर दर्शको का मन मोह लिया। इस अवसर पर संस्कार भारती बैतूल के महामंत्री योगेन्द्र ठाकुर, यश कुशवाह, प्रताप धुर्वे, अंबादास सूने,श्याम म्हस्की, अतुल देशपांडे , राघवेंद्र सिसोदिया सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।