संत रविदास जयंती पर छात्रों को मिला जीवन मूल्यों का संदेश
बैतूल। जनजाति कार्य विभाग बैतूल के तत्वावधान में सीनियर अनुसूचित जाति बालक छात्रावास एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच संत शिरोमणि रविदास जी की 649वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा समिति के जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे रहे। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला महामंत्री श्री पर्वत राव धोटे, अजाक्स के जिला अध्यक्ष श्री दशरथ धुर्वे, तहसील अध्यक्ष श्रीमती कल्पना परते, ब्लॉक अध्यक्ष श्री मुकेश उपराले तथा जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त श्री विवेक पांडे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं मंचासीन होने के पश्चात संत रविदास जी एवं बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पूजा-अर्चना के साथ की गई। इसके बाद सभी अतिथियों का पुष्पमालाओं से सम्मान किया गया।
-छात्रों को मोबाइल के दुरुपयोग से दूर रहने की दी सलाह-
मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों को नशा एवं मोबाइल के दुरुपयोग से दूर रहकर अनुशासित जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रावास में प्रवेश मिलना सौभाग्य की बात है, इसका सदुपयोग कर शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवारें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संत रविदास जी के विचारों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण, शिक्षा और सामाजिक व्यवहार में उतारें। तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है।
-महान समाज सुधारक थे संत शिरोमणि रविदास-
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त विवेक पांडे ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी केवल एक संत ही नहीं, अपितु समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करने वाले महान समाज सुधारक थे। उन्होंने बताया कि संत रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा को काशी के समीप सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता संतोष दास एवं माता कालसी देवी थीं। श्री पांडे ने कहा कि उस दौर में जब समाज जाति, ऊंच-नीच और भेदभाव में बंटा हुआ था, तब संत रविदास जी ने निर्भीक होकर समानता और मानव गरिमा की बात कही। उन्होंने कर्म को ही सबसे बड़ा धर्म बताया और यह संदेश दिया कि मन की पवित्रता ही सच्ची पूजा है।
उनका प्रसिद्ध कथन मन चंगा तो कठौती में गंगा आज भी समाज को आत्मचिंतन और सदाचार की प्रेरणा देता है।
सहायक आयुक्त श्री पांडे ने कहा कि संत रविदास जी ने शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों को आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने परोपकार, दया, करुणा और प्रेम को समाज की मूल नींव बताया। संत रविदास जी का संपूर्ण जीवन समतामूलक, न्यायपूर्ण और मानवतावादी समाज की स्थापना के लिए समर्पित रहा।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों से संत रविदास जी के जीवन एवं विचारों पर प्रश्न पूछे गए, जिनके सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को 500-500 रुपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में अधीक्षक कमलेश राकसे, नीरज बरसाकर, अलकेश पाटणकर, छात्रावास स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।












