श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन, गांव गांव से उमड़े लोग, ब्रह्माकुमारी आस्था दीदी की विदाई पर बोझिल हुई महिलाओं की आंखें , लक्ष्मी बहन ने जताया आभार

मध्य प्रदेश के लोग देश के हृदय में प्रकृति की गोद में रहते हैं

समुद्र के किनारे रहते हैं तो सीप मिलते हैं गहराई में जाओ तो मोती मिलते हैं यही श्रीमद् भागवत गीता सिखाती है।

 

घोड़ाडोंगरी नगर के दुर्गा चौक में ब्रह्माकुमारी संस्थान घोड़ाडोंगरी द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का शनिवार को समापन हुआ सातवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी आस्था दीदी ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता का सार यही है कि जो हुआ जो हो रहा है सब अच्छा है जो होगा और भी अच्छा होगा जो कुछ यहां से मिला वह यही छोड़कर जाना पड़ेगा । धन सारा धरा पर धरा रह जाएगा ।।जैसे इत्र की खुशबू चारों तरफ फैलती है वैसे ही हमारे मन के विचारों का प्रभाव सब तरफ होता है। परिस्थितियों हमें निखारती है कलयुग बच्चा नहीं है बूढ़ा हो गया है उन्होंने कई उदाहरण के माध्यम से बताया। धरती आज टिकी हुई है तिनके भर धर्म के कारण। ऐसा कलयुग आएगा जिसमें कर्म की कमाई से ज्यादा भ्रष्टाचार का बोलबाला होगा।

मध्य प्रदेश के लोग देश के हृदय में प्रकृति की गोद में रहते हैं ।बुराई एक से दूसरे में फैलती है और अच्छाई भी एक से दूसरे में फैलती है। ऐसा समय आएगा लोग मंच से बड़ी-बड़ी बातें करेंगे लेकिन आचरण से विषय वासना में लिप्त रहेंगे ।ऐसा ज्ञान सुनाने वाले बढ़ जाएंगे ऐसा समय आएगा की मां-बाप बच्चों से इतना मोह रखेंगे की बच्चों के लिए मोह दुख का कारण बन जाएगा। मां-बाप अपनी चार संतानों को पाल लेंगे लेकिन संतानों के लिए माता-पिता बोझ बनकर रह जाएंगे। यही स्थिति इस घोर कलयुग में उत्पन्न हो गई है। वृद्ध आश्रम बढ़ रहे हैं

उन्होंने कहा कि भगवान को बच्चा बनकर उनसे प्रेम करें । अपने जैसे कर्म रहेंगे संताने भी वही सब सीखेंगे । अब समय कर्म बंधन बनाने का नहीं है । जो कर्म हम अपने बुजुर्गों के साथ करते हैं वही कर्म हमारे बच्चों के रूप में सामने आते हैं । जब तक बातों को पकड़ कर रखते हैं भारी लगता है । बेटी की तरह का भाव बहू के लिए रखो। अमावस की रात बड़ी काली होती है पर सुबह होती है ।सूर्योदय के बाद तक जो सोते हैं वह भोगी के समान हैं। अभी का समय संगम युग का है युवा सोचते हैं कि ज्ञान सुनना बुजुर्गों का काम है लेकिन जिन्हें जीना है उन्हें सीखने की जरूरत है जो बूढ़े हो गए उनका तो समय निकल गया ।

कई पीढियो से सुन रहे हैं कि कलयुग बच्चा है । ज्ञानयज्ञ सबसे श्रेष्ठ होता है इसमें अपनी बुराइयों को स्वाहा करते हैं जब तक काम क्रोध लोभ मोह अहंकार जैसी बुराइयों को नहीं निकालेंगे अपने जीवन सुगंध से नहीं भरेगा ।उपवास का अर्थ है संकल्प करो । हर साल रावण बड़ा होता जा रहा है अंदर से बुराई रूपी रावण की आहुति देने का समय है ।समुद्र के किनारे रहते हैं तो सीप मिलते हैं गहराई में जाओ तो मोती मिलते हैं यही श्रीमद् भागवत गीता सिखाती है।

धर्म का अर्थ नारे लगाना नहीं। रामायण हमें मर्यादा में जीना सिखाती है आयोजन को ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी सुनीता दीदी ने भी संबोधित किया घोड़ाडोंगरी संस्थान की ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी बहन कार्यक्रम में मिले सहयोग के लिए सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया ।उन्होंने बताया कि 1 वर्ष से उनका संकल्प था घोड़ाडोंगरी में यह आयोजन को लेकर अपने उदबोधन में उन्होंने बताया कि आज ही योग शक्ति आस्था दीदी घोड़ाडोंगरी से जा रही हैं। सुनकर कथा सुनने आई महिलाओं की आंखें बोझिल हो गई और उन्होंने भारी मन से आस्था दीदी को विदाई दी।