पिता के श्राद्ध पर गरीबों को भोजन कराना एक

प्रमोद सूर्यवंशी

पिता के श्राद्ध पर गरीबों को भोजन कराना एक बहुत ही पुण्य का काम है। श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद, पितरों को अर्पित किया गया प्रसाद या अन्य भोजन जरूरतमंदों, गरीबों, और ब्राह्मणों में वितरित करना शुभ होता है।नगरपालिका आमला द्वारा संचालित दीनदयाल रसोई केंद्र में वार्ड नंबर 16 के पार्षद व लोकनिर्माण सभापति रोहित हारोड़े ने अपने स्वर्गीय पिता श्री मंशाराम हारोड़े की स्मृति मे गरीब, जरूरतमंद व दिव्यांगो, को भोजन करवाया। श्राद्ध पक्ष में अस्टमी व नवमी दो दिनों तक पार्षद रोहित हारोड़े द्वारा गरीबो को विशेष भोजन करवाया गया पार्षद द्वारा पिता के श्राद्ध पर जरूरतमंदो और गरीबों को भोजन कराना एक सराहनीय कार्य है।

यह न केवल पारिवारिक परंपरा का पालन है, बल्कि समाज सेवा का भी एक अच्छा उदाहरण है। श्राद्ध हिंदू परंपरा में पितरों को श्रद्धांजलि देने का एक महत्वपूर्ण कर्म है। जरूरतमंदों को भोजन कराना समाज मे सहयोग और करुणा की भावना समाज सेवा को बढ़ावा देता है। समाजसेवी रोहित हारोड़े का एक पार्षद के रूप में सामाजिक जिम्मेदारी निभाना और ऐसे आयोजन करना प्रशंसनीय है।