सारनी —- मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने हाल ही में कंपनी के लिए नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। जिसमें विभिन्न केडर के पदों का समावेश है। संयंत्र सहायक के पदों पर कार्यरत विद्युत कर्मचारी जिन्हें 10-15 वर्ष हो गए हैं। उनको अभी तक पदोन्नत नही किया गया है। विद्युत मंडल कर्मचारी यूनियन मध्यप्रदेश सारनी के क्षेत्रीय महामंत्री अंबादास सूने ने जारी प्रेस विज्ञप्ति मे बताया कि विज्ञापन में 5 वर्ष का अनुभव रखने वाले संयंत्र सहायक की भर्ती के साथ ही कार्यालयीन कार्य के लिए सहायक श्रेणी तीन के पदों पर भी पर्याप्त भरती नहीं की जा रही है। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण में सभी नियुक्त कार्यालय सहायक श्रेणी तीन मुख्यालय जबलपुर में ही पदस्थ किये जा रहे हैं। अन्य ताप एवं जल विद्युत गृहों में उंट के मुंह जीरा के बराबर पदों को पदस्थ कर रहे हैं। इसी विज्ञापन में दो डॉक्टर की भर्ती की जा रही है। संगठन ने सतपुडा ताप विद्युत गृह के चिकित्सालय में डाक्टर्स की स्थाई नियुक्ति के लिए विगत 5-6 वर्षों से लगातार पत्राचार करता रहा है। केंद्र सरकार के 7 वें वेतनमान को कंपनी ने स्वीकार किया। लेकिन अव्यसायिक भत्ता एन पी ए फिक्स कर दिया। सारनी में डाक्टर्स आते हैं और चले जाते हैं। सारनी में डाक्टर्स के 8 पद स्वीकृत है। केवल एक डाक्टर नियमित है। बाकी के 4-5 डाक्टर्स आये कब तक सेवा देगें किसी नहीं मालूम। संगठन ने नान प्रेक्टिस अलाउंस के लिए भी प्रयास किए जिसके फलस्वरूप 18 जुलाई-25 को 20 प्रतिशत मूल वेतन का भत्ता देने के कंपनी ने आदेश जारी किए जो कि एक अप्रैल 25 से प्रभावशील है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड में नियमित कार्य भी ठेके पर दिये जा रहे हैं। सतपुडा संकुल में लगभग छ: सौ अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है। एक हजार से पंद्रह सौ श्रमिक ठेकेदारों के पास काम कर रहे हैं। क्या मज़दूरों का भला हो रहा है।मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने अपने सहायक अभियंताओ को विभिन्न स्थानों पर प्रतिनियुक्ति में पदस्थ किया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से कंपनी के पावर प्लांट में पदस्थ किया जाए। क्षेत्रीय महामंत्री अंबादास सूने ने बताया कि यही हाल कार्यालयीन स्टेनों, सहायक श्रेणी तीन का है।
आफिसों में भृत्य नहीं है सभी जगह ठेकेदारी चल रही है। सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी ठेका प्रथा प्रचलित हो गई है। सुरक्षा सैनिक को चतुर्थ श्रेणी बदले तृतीय श्रेणी में रखा जाए। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर कंपनी प्रबंधन के साथ ही प्रांतीय महामंत्री सुशील शर्मा को भी पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।







