विद्यार्थियों को योगासन और प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए किया प्रेरित
बच्चों को एकाग्रता बढ़ाने के लिए अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ताड़ासन की दी जानकारी
बैतूल। गुनखेड के वैष्णवी पब्लिक एकेडमी और वाणी पब्लिक स्कूल में गुरुवार को एक ऐसा प्रेरणादायक सेमिनार हुआ, जिसने बच्चों की सोच को नई दिशा दी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे डॉ. नवीन वागद्रे ने बच्चों को बताया कि प्रकृति ही सबसे बड़ी शिक्षक है और उससे जुड़कर जीवन जीना ही सच्ची शिक्षा है। स्कूल के डायरेक्टर डॉ. रविंद्र झाड़े ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. वागद्रे का स्वागत किया।
सेमिनार में डॉ. वागद्रे ने प्राकृतिक चिकित्सा, योग और संतुलित जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह हम अपने जीवन से रोगों को दूर रख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को योगासन और प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। खासतौर पर अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ताड़ासन को उन्होंने बच्चों की एकाग्रता और मेमोरी पावर बढ़ाने वाला बताया।
– जंक फूड से करें परहेज
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि जंक फूड से परहेज करना क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया कि ऐसे फूड में पाया जाने वाला एमएसजी यानी मोनो सोडियम ग्लूटामेट शरीर के लिए हानिकारक होता है और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। डॉ. वागद्रे ने इस अवसर पर अपनी चर्चित पुस्तक सीड्स सेहत और जीवन का संगम का भी परिचय बच्चों से करवाया और बताया कि अलसी, सूरजमुखी, तिल, कद्दू जैसे बीज पोषण से भरपूर हैं, वे कई गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि अगर वे अभी से ही योग, पौष्टिक आहार और प्रकृति के साथ समय बिताना शुरू कर दें, तो वे बीमारियों से दूर रहेंगे, पढ़ाई में भी अव्वल आएंगे।
– प्राचार्य ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर वाणी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य वी. के. अमरूते ने डॉ. वागद्रे के प्रति आभार जताया और कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। यह आयोजन बच्चों के लिए स्वास्थ्य की दिशा में एक जागरूक पहल रहा, उनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए भी एक मजबूत आधार साबित हुआ।







