बेटियां पिता का पुण्य है बहु प्रभु का प्रसाद है……पं मनावत शास्त्री
आमला। बेटियां पिता का पुण्य होती है। पूर्वजों का आशीर्वाद होती है। बेटियां प्रभु का अनुग्रह होती है ।बेटियां कुल की कीर्ति होती है बेटियां परिवार की प्रतिष्ठा होती है। बेटियां आंगन का आनंद होती है। बेटियां उमंग है। बेटियां उल्लास है । बेटियां उत्सव है। बेटियां उत्साह है।जिस घर में बेटी ने हो उस घर के तीज त्यौहार सूने होते हैं।
यह विचार मानस वर्मा की पंडित श्याम जी मनावत जी ने भगवती पार्वती जी के जन्मोत्सव के उल्लास भरे प्रसंग में कहे।
ग्राम जंबाडी में श्रीमती सिंधु देवी गीतकार के परिवार में शिव महापुराण का भव्य आयोजन चल रहा है। मौसम की प्रतिकूलता के बाद भी श्रोता भक्ति भाव से कथा का आनंद लें रहे हैं। अवंतिका धाम उज्जैन से पधारे विद्वान वक्ता पंडित श्याम जी मनावत जीवन से जुड़े संदर्भो को पौराणिक प्रमाण दे रहे है।
पंडित मनावत जी ने कहा कि बहू भी परिवार का मान सम्मान है वह भी हमारे कुल का स्वाभिमान है ।जिस घर में बहु को भी बेटी जैसा स्नेह और लाड़ प्यार मिलता है वह घर बैकुंठ है ।पिता की प्राण प्यारी बेटी को जब ससुर में पिता दिखाई देता है ,सांस में मां दिखाई देती है देवर में भाई दिखाई देता है ननद में बहन दिखाई देती है तो वह अपने पिता का घर भूलकर पूरी तरह ससुराल की हो जाती है ।किसी कुल की बेटी को अपनी कुल की बहू बने के लिए उसे इतनी आत्मिता देना आवश्यक है l







