सीआईडी एवं सीबीआई जांच मैं कौन सत्ता पक्ष के नेताओं में हो रही बेचैनी
सुसाइड केस में समाज को आगे करके कौन सत्तापक्ष का नेता अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहा
सारनी।भारतीय जनता पार्टी को आमला विधानसभा के नगरपालिका सारनी क्षेत्र में कुंबी समाज को आगे कर कौन सत्ताधारी नेता पार्टी को कमजोर करने का षड्यंत्र कांग्रेस के इशारे पर कर रहा है।यह बाते अब नपा क्षेत्र में गूंज रही है,और कयास लगाए जा रहे है कि भाजपा के ही कुछ पदाधिकारी सुसाइट केस मे क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियो के नाम आने से अपनी राजनीति कुंठा को मिटाने के लिये जिस तरह इस मामले को विपक्षी पार्टियो के साथ मिलकर षणयन्त्र रचा की ये सुसाइट केस को जिले मे चर्चा का विषय बना रहा।जबकि एक महिने पूर्व हुए सुसाइट केस मे न पक्ष विपक्ष के जनप्रतिनिधी अनिल खवसे के घर सांत्वना देने गये न कोई ज्ञापन दिया गया। लेकिन अचानक रविंद्र देशमुख सुसाइड केस में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम आते ही सत्तापक्ष व विपक्ष के नेताओं ने सबसे पहले सुसाइट नोट को वायरल किया। जिससे अपनी राजनीति महत्वाकाशां की पूर्ति कर सके अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बगैर जाँच के आरोपी बनाने पर जब विरोध स्वर उठने लगे कई सामाजिक संगठन भाजपा पदाधिकारी इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीआईडी जांच की मांग ज्ञापन के माध्यम की तो यह तथाकथित सत्ताधारी कुछ नेता सामाजिक राजनैतिक लोगों को इस मामले से दूर रहने की धमकी तक दी जा रही है।
इन्होंने यह भी नहीं सोचा इस मामले में जो भाजपा का पदाधिकारी ने सुसाइड किया उसमें सुसाइट नोट मे भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी मंडल महामंत्री का भी नाम है इसकी निष्पक्ष जांच की मांग वह भी कर सकते थे।लेकिन इन्हे इतनी जल्दी थी कि मामला जल्द से जल्द कायम हो पुलिस पर कुछ तथाकथित मिडिया समूह को आगे करके इतना प्रेशर बनाया गया जैसे जिले का सबसे बड़ा मामला हो सारे लोग पर मामला कायम होने पर इन्हें ठंडक मिली जबकी यह मामला मृतक एवं व्यापारियों के बीच का था जो वर्षों से व्यापारियों द्वारा पुलिस अधीक्षक,सारणी एसडीओपी, सारणी थाना प्रभारी एवं चौकी पाथाखेड़ा के बीच पैसे को लेनदेन को लेकर शिकवे शिकायत चल रहे थे शिकायत होती तो पुलिस कार्रवाई करने को जब भी तत्पर होती तो सत्ता पक्ष के एक जिला पदाधिकारी द्वारा पुलिस पर दवाब बनाकर मामले को शांत कर दिया जाता था। अगर पुलिस इस पदाधिकारी की नही सुनती तो आज ये दो युवा सुसाइट नही करते कहीं ना कहीं रविन्द्र देशमुख के साथ राजनीतिक षणयन्त्र का शिकार हुआ है।अपनी महत्वाकांक्षा मिटाने के लिए उसका इस्तेमाल कर उसके दिलों दिमाग में जहर भरा गया सारनी थाने मे मामला दर्ज होने के बाद सामाजिक व राजनैतिक संगठन के लोग इस मामले मे व्यापारी पत्रकार व जनप्रतिनिधियों के नाम आने के बाद लोग इसे साजिश करार देते हुए
सीआईडी जाँच की मांग जोर पकड़ने पर इन षणयन्त्र कारियो ने समाज को आगे करके अपनी राजनीति रोटी सेकने का कार्य किया गया। इस मामले को इतना तुल दिया जिसे जिले का सबसे बहुत चर्चित मामला बता दिया क्योंकि यह मामले में अगर भाजपा के जनप्रतिनिधियों का नाम नहीं होता तो इसे भी अनिल खवसे के सुसाइट केस जैसा भूला दिया जाता भाजपा का ही कोई है जो भाजपा को एक समाज के नाम पर कमजोर करने का षड्यंत्र कर रहा है,जबकि कुंबी समाज के जिले से लेकर स्थानीय कई लोग खुलकर कह रहे है कि कुछ चुनिंदा लोग पूरा समाज नहीं होता,और नपा क्षेत्र सारनी की घटना में दोषियों पर एफ आई आर हुई है।कुंबी समाज के कई लोग कहते है कि यह भाजपा की आपसी लड़ाई चल रही है
जिसमे भाजपा के ही कुछ लोग कुंबी समाज को आगे कर राजनीतिक कर रहे है। सुसाइड केस मे जो इसमें अभियुकत बनाये गये है वह सीआईडी एवं सीबीआई जांच की मांग कर रहे है उनका कहना है इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कौन लोग हैं जिन्होंने मृतक को अवैध पिस्तौल उपलब्ध कराई व्यापारियों के करोड़ों रुपए कहां गए कौन नेता पुलिस के जांच को प्रभावित कर रहा था बार-बार यह मामला पुलिस के सामने आने के बाद भी पुलिस लाचार क्यों थी सीआईडी जाँच की मांग यह तथाकथित नेताओं को एवं उनके परिजनों को भी करनी थी लेकिन वह नहीं चाहते कि इस मामले की सीआईडी जांच हो क्योंकि इस मामले में अगर सीआईडी जांच होती तो कई लोग जेल के सलाखों में होंगे जो लोग रविंद्र देशमुख के साथ बैठा करते थे उनकी कॉल डिटेल सीडीआर की जांच होनी चाहिए जिससे साफ पता चल जाएगा यह मामले में राजनीतिक षणयन्त्र रचा गया
दोनों ही सुसाइड केस में भाजपा का सत्ताधारी दल का एक नेता शामिल है जो इस मामले को अपनी कूटनीतिक साजिश के तहत अपने ही पार्टी के पदाधिकारी को फसाने का कार्य किया यदि मृतक इनसे पीड़ित होते तो यह सत्तापक्ष के पदाधिकारी अपनी राजनीतिक पहुंच को बताते हुए इसकी शिकायत पुलिस को करते की हमारे पार्टी के कुछ लोग मृतक को परेशान कर रहे है। यह मामले को 6 महीने बीत जाने के बाद भी इनकी मनसा शांत नहीं हो पा रही इस प्रकरण मे जो अभियुकत 14 लोगों को बनाया गया और न्यायालय से जमानत होने के बाद भी यह कुठीत पदाधिकारी अपने ही पार्टी के लोगों को न्यायालय से जमानत पर मिलने पर बौखला गए लोगों को उनसे न मिलने की फरमान जारी करते हैं जबकि जिले में कई ऐसे सत्ता एवं विपक्ष के पदाधिकारी हैं जिन पर कई गंभीर आरोप एवं न्यायालय मे मामले चल रहे हैं लेकिन यह जिला पदाधिकारी उनके साथ शान से फोटो खींचाते हैं लेकिन इनकी दोहरी छल कपट की नीति क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिन्होंने इन्हें राजनीति में लाया उन्हें ही डसने का कार्य कर रहे है रविन्द्र देशमुख के परिजनों को
आगे करके कुछ मीडिया समूह को अपने जाल में फंसा कर गेस्ट हाउस में इनके साथ बैठकर एक जैसे पेड न्यूज़ बनवाकर खबरे प्रकाशित किया जा रहा है जो भी खबर लग रही है उसे लगाने वाले पत्रकार खुद ही जेलो के सलाखों में रह चुके हैं इन मिडिया समूह को मानहानी का नोटिस व जिला कलेक्टर जिला जनसर्पक अधिकारी से की गयी है यह लोग वाटसप पेपर चलाकर एक जैसी खबरे प्रकाशित की जा रही है इन लोगों के पेपर भी नही आते गलत तरिके से सरकारी विज्ञापन लिये जा रहे है! सुसाइड केस की अगर सीआईडी जांच होती है तो कहीं ना कहीं इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ होगा की किन लोगों ने उसके दिलों दिमाग पर जहर भरा जिससे दो युवा सुसाइड कर लिया और इस तथाकथित नेता की राजनीति में आगे बढ़ने के लिये अपने लोगों की बली दे दी उन्हें इस बात का डर सता रहा है कही यह वापस राजनीति में सक्रिय ना हो जाए।इस सुसाइड किसकी सीआईडी एवं सीबीआई जांच होती है तो इस मामले का चौंकाने वाले खुलासे होंगे जो
षणयन्त्रकारियों को हजम नहीं हो रही है जबकि अनिल और रवि की तरह पिछले 6 माह में बैतूल जिले के 10 ब्लॉक में 29 ऐसे मामले हुए हैं जिन्होंने आत्महत्या करके सुसाइड नोट जारी किया है जबकि भाजपा के ही पूर्व सरपंच चिचोली में आत्महत्या करके तीन लोगों का नाम लिखा इस मामले की किसी भी अखबार और प्रिंट मीडिया में सुर्खियां नहीं बटोर पाई आखिर इसी मामले को कुछ कुंठित भावना से ग्रसित नेता और मीडिया के तथाकथित पत्रकार आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।







