स्व० रविन्द्र देशमुख, अनिल खवसे सुसाइट केस मे क्षेत्र के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधी व्यापारी पत्रकारगणो पर दर्ज प्रकरण की सीआईडी एवं सीबीआई जाँच की जाये- रंजीत सिंह

स्व० रविन्द्र देशमुख, अनिल खवसे सुसाइट केस मे क्षेत्र के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधी व्यापारी पत्रकारगणो पर दर्ज प्रकरण की सीआईडी एवं सीबीआई जाँच की जाये- रंजीत सिंह

अवैध पिस्टल देने वाले की गिफ्तारी न होना एव निजी पिस्टल बताना जाँच को भटकाने की कोशिश

बैतूल। मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ बैतूल के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम व जिला कलेक्टर व जिला पुलिस अधिक्षक को पत्र सौपकर
थाना क्षेत्र सारनी जिला बैतूल में सुसाइट केस स्व० अनिल खवसे पंजीकृत प्रकरण क्रमांक 405/24 दिनांक 10/9/24 एव स्व० रविन्द्र देशमुख दर्ज प्रकरण क्रमाक 444/24 दिनांक 7/10/24 मे क्षेत्र के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि, व्यापारी, पत्रकार गण लोगों पर दर्ज प्रकरण की सीआईडी एवं सीबीआई जांच कर निपक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होने कहा की मै भारतीय जनता पार्टी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक विधायक प्रतिनिधी के पद पर कार्य कर रहा था। मै पिछले 34 वर्षों की राजनीती मे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल का जिला सहसंयोजक, युवा मोर्चा का जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी मंडल सारणी के मंडल महामंत्री, दो बार मंडल अध्यक्ष, भाजपा बैतूल के जिला मंत्री पद पर कार्य कर चुका हूं। मैंने सारी जिंदगी भाजपा की विभिन्न पदो पर कार्य किया मुझ पर आज तक कभी भी कोई प्रकरण दर्ज नही हुआ एवं वर्तमान में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला बैतूल का जिला अध्यक्ष, भोजपुरी एकता मंच का जिला अध्यक्ष के पद पर हूं। मुझे राजनीतिक द्वेष मे षड्यंत्र के तहत सुसाइड केस मे फसाया गया। मृतक रविंद्र देशमुख के सुसाइड नोट मे क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि एवं पत्रकारों का नाम शामिल है। बैतूल जिले के थाना क्षेत्र सारनी में दो व्यक्तीयो द्वारा अनील खवसे द्वारा दिनांक 10/9/2024 को एवं रविन्द्र देशमुख द्वारा दिनांक 07/10/2024 आत्म हत्या की गई। पुलिस द्वारा मृतक से प्राप्त तथाकथित सुसाइट नोट के आधार पर धारा 108 के तहत जनप्रतिनिधी, पत्रकार, व्यापारी सहित कई लोगो पर बिना जॉच के मामला दर्ज किया गया है। उक्त प्रकरण में भारी लापरवाही की गयी। स्व० अनिल खवसे सुसाइट केस की जाँच मे आज तक चालान पेश नही किया गया जो षडयंत्र की ओर इशारा करता है। स्व० रविन्द्र देशमुख एव अनिल खवसे केस की जाँच करना आवश्यक है। रंजीत सिंह ने पुलिस महानिरीक्षक को निम्न बिन्दूओं पर विस्तृत जांच किए जाने की माँग की है। जिनमें मृतक अनिल खवसे द्वारा दिनांक 10/09/24 को आत्म हत्या की गई उस के पूर्व भी तीन बार अनिल खवसे द्वारा व्यापारियो के पैसे न देना पड़े आत्म हत्या का प्रयास किया गया। पाथाखेड़ा होस्पिटल मे एडमिट रहा किन्तु स्थानीय पुलिस द्वारा कोई प्रकरण दर्ज न करके भारी लापरवारी की गयी। अगर उसके बयान लिये गये तो सार्वजनिक होना चाहिये कि वह बार बार किसके कहने पर सुसाइट का प्रयास कर रहा था ? उसका मास्टर मांइड़ कौन था ? मृतक अनिल खवसे द्वारा जब फाँसी लगाकर आत्महत्या कि गई आत्महत्या के बाद पुलिस के पहुचने के पूर्व किसने अनील खबसे को फांसी के फन्दे से उतारा। क्योकि उनकी पत्नी के अलावा किसी ने फाँसी पर लटके हुए नही देखा। इसके कोई फोटो ग्राफस नही है। सीसी टीवी भी बन्द थे। उस दिन रविन्द्र देशमुख व उसका भाई, अनिल खवसे के घर गये थे इसकी जाँच होनी चाहिये। मृतक अनिल खवसे का लम्बे समय से कई लोगो से लेन देन का विवाद चल रहा था। जिसकी शिकायत लगातार सारनी एसडीओपी कार्यालय मे की जा रही थी। कई व्यापारियो के बयान पुलीस द्वारा लिये गये। आखिर क्यों कार्यवाही नही की जा रही थी ? कौन क्षेत्र के प्रभावशील जनप्रतिनिधी के कहने पर उन्हे छोड़ दिया जाता एवं किन किन लोगों के बयान दर्ज हुए ? इसकी जाँच होनी चाहिये। मृतक अनिल खबसे और मृतक रविन्द्र देशमुख का आपस में पैसो के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। अनिल खवसे एव उसके भाई द्वारा सुजालपूर में मकान बेचा गया। जिसका पैसा रविन्द्र देशमुख के खाते एवं नगद उसके पास था। अनिल खबसे और रविन्द्र देशमुख बैक लेनदेन की जांच की जानी चाहिए। जिस दिन 10/9/24 अनिल खवसे ने सुसाइट किया उस समय स्व० रविन्द्र देशमुख पाथाखेड़ा चौकी मे उपस्थित था। सीसीटीवी की जाँच की जाये घटना के बाद भोपाल क्यों चला गया ? लोगों को क्यो कहा की मै भोपाल में हूं। उसका लोकेशन पाथाखेड़ा शोभापुर में था। घटना के दिन का मोबाइल लोकेशन निकाला जाये।
मृतक रविन्द्र देशमुख द्वारा गैर लाईसैन्स अवैध बन्दुक से आत्म हत्या की वह बन्दुक कहाँ से आई ? कैसे आई ? किन लोगों ने उपलब्ध करायी? इसकी जाँच की जानी चाहिए। अभी तक अवैध पिस्टल देने वाला गिफ्तार क्यों नही हुआ ? उसे निजी पिस्टल पुलिस द्वारा क्यो बताया गया ?
मृतक रविन्द्र देशमुख द्वारा आत्म हत्या के समय घर के CCTV कैमरे क्यो बन्द थे।मृतक रविन्द्र देशमुख के पास दो मोबाइल थे। घटना स्थल से पुलीस द्वारा एक मोबाइल ही जप्त किया गया। दुसरा मोबाइल उनकी पत्नी द्वारा एक हफ्ते बाद डाटा डिलीट कर जमा किया गया। जिसकी जाँच की जाये। डाटा को रिकवर किया जाये कि वह किन लोगों के संपर्क में था ? पैसे के लेनदेन को लेकर रात में उसकी किससे बहस हुई थी ? उसके कॉल डिटेल निकाले जाये।
मृतक रविन्द्र देशमुख एवं मृतक अनील खवसे BC और सोसाइटी चलाते थे। नगर के कई व्यापारी और कोल कामगारों का करोड़ो रुपये बीसी और सोसाइटी में लगा था। जो वापस नही हो रहा था जिसकी शिकायत लगातार पुलीस चौकी पाथाखेडा थाना सारनी एव पुलीस अनुविभाग सारनी मे हो रही थी। कई व्यापारियो के पास आज भी चैक मौजूद है। उनके बयान दर्ज कीये जाये उनके पैसे वापस दिलाया जाये।
मृतक रविंद्र देशमुख द्वारा जिन लोगों का जिक्र सुसाइट नोट में किया गया है उन सभी लोगों के कॉल डिटेल बैंक स्टेटमेंट की जांच की जाए। मृतक रविन्द्र देशमुख के बैक स्टेटमेंट की जाच की जाए। किन किन लोगो से मृतक का लेन देन था ?
मृतक रविन्द्र देशमुख सुसाइट नोट में मनोज खवसे मृतक (अनिल खबसे का भाई) का जिक्र किया है। रविन्द्र देशमुख पर गंभीर आरोप लगाये है। इस वजह से मृतक परिवारी कलह से परेशान हो सकता है।
मृतक रविन्द्र देशमुख की अंतीम बार फोन पर किस से बात हुई। किन लोगों के साथ उठना बैठना था ? उसकी जाँच होनी चाहिये।
स्व० रविन्द्र देशमुख ने 6 पेज का सुसाइट नोट लिखकर सुसाइट किया। आत्महत्या के लिए प्रेरित हुवा व्यक्ती 6 पेज का सोसाइट नोट नही लिख सकता। सोसाइट नोट में नाम, मोबाइल नंबर, प्रतिष्ठान, पते सब का उल्लेख कर बिना शाब्दिक त्रुटियों के सोसाइट नोट लिखना सम्भव नही है। क्योकी पुलिस द्वारा जब्त उसकी सुसाइट नोट व उसकी पत्नी द्वारा उपलब्ध 10 पेज मे कई शब्दो मे कई मात्रा दोष है। क्या कोई मृतक को सुसाइट नोट लिखने के लिए प्रेरित कर रहा था ? परेशान व्यक्ती क्या 6 पेज एक दिन मे लिख सकता है? उसके सुसाइट नोट को किन लोगों ने वायरल किया? जबकि अनिल खवसे का सुसाइट नोट आज तक सोशल मिडिया मे नही आया। उसे सार्वजनिक किया जाये। क्या उसमें किसी अधिकारी व अन्य नाम थे जिसे छुपाया जा रहा है। आत्म हत्या के वक्त घर पर पत्नी बच्चे नही थे। घर के उपर बड़ा भाई देवेन्द्र देशमुख एवं उनकी पत्नी घर पर ही थी। जब गोली चली तो गोली की आवाज भाई ने नही सुनी ? ये जाँच का विषय है। श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने पुलिस महानिरीक्षक को पत्र देकर बताया कि स्व० रविन्द्र देशमुख द्वारा आत्म हत्या के पूर्व कभी भी मेरे खिलाफ पुलीस में कोई शिकायत नही की। जबकी मृतक रविन्द्र देशमुख का लेन देन के विवाद कई व्यपारियो से था। उसने न्यायालय मे चेक बाउंस के केस दायर कर रखे थे। मृतक रविन्द्र देशमुख की मृत्यू से किसे सबसे ज्यादा आर्थिक लाभ होना था ? क्या उस व्यक्ती द्वारा मृतक की हत्या तो नही की गई ? रविन्द्र देशमुख सुसाइट नोट मे मिडिया द्वारा एक जैसे प्लांटेट खबरे लग रही है। इसके पीछे मास्टर मांइड़ कौन है? कई लोगों पर अपराधिक प्रकरण व सजायाक्ता लोग है इनके अपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जाय एवं किरण देशमुख के खातो की जाँच की जाये। ये मिडिया समूह व स्व० रविंद्र देशमुख की पत्नी किरण देशमुख सीआईडी एवं सीबीआई जाँच से क्यों बचना चाहती है ?
स्व० रविन्द्र देशमुख के बीसी का कार्य गोविन्द साहू की देख रेख मे होता था। अभी भी बीसी वसूली का कार्य कर रहा है। इस पर तत्काल रोक लगाई जाये। इसने परिवार के नाम से लोन ले रखा है। इसकी खातो की जाँच की जाये। बैक आफ इंडिया बगड़ोना से नियम विरुद्ध लोन सैकड़ो लोगों को लोन दिलाया गया। ये करोड़ो रुपये कहा लगाये गये। बैक आफ इंडिया बगड़ोना लोन प्रकरण की जाँच की जाये।
पत्रकारो पर पुलिस द्वारा बगैर जाँच के प्रकरण दर्ज कर लिया गया।
रंजीत सिह ने बताया की मै भाजपा का जनप्रतिनिधी होने के साथ साथ विधायक प्रतिनिधी था। राजनीतिक द्वेष से मेरा नाम सुसाइट नोट मे डाला गया जबकी रविन्द्र देशमुख के साथ मेरा तीन वर्षों मे कभी बात नही हुई। मेरी सीडीआर व बैक खातो की जाँच पुलीस ने की। कभी भी मृतक से मेरे कोई संबध नही रहें मेरा नाम काग्रेस, आप पार्टी व राजनीतिक द्वेष रखने वाले साजिश के तहत मुझे फंसाया गया। इसलिये दोनों केस की सीआईडी एवं सीबीआई जांच करायी जाये क्योंकि पुलिस अधीक्षक ने जो कांग्रेस की मांग पर एसआईटी बनाई थी उसने निम्न बिन्दुओ की जाँच न कर सिर्फ हम लोग की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी बनाई। एसआई टी मे सारनी के पुलीस को शामिल किया गया जो न्याय संगत नही है। जिनकी वजह से वीसी, ब्याज, आईपीएल, अवैध खाते के लेनदेन, अवैध पिस्टल, सीसी टीवी का बन्द होना, अनिल खवसे के सुसाइट नोट मे पुलीस अधिकारियो के कार्यप्रणाली का जिक्र होना, 90 दिन के बाद भी चालान पेश न होना, इन सब बिंदुओं की जाँच बैतूल जिले के बाहर की पुलिस से इसकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए कि कौन लोग पिछले डेढ़ वर्षो से व्यापारियों के शिकायत पर जांच कर रहे थे और उन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अगर समय रहते कार्रवाई की होती तो क्षेत्र के दो युवा सुसाइट नहीं करते। इस मामले मे व्यापारी पत्रकार व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो पर बगैर जाँच के प्रकरण दर्ज कर लिया गया I बार बार झुठी शिकायते स्व० रविन्द्र देशमुख की पत्नी से करवायी जा रही है। पर्दे के पीछे जो लोग उसे बेनकाब किया जाये। इसकी उच्च स्तरीय सीआईडी एव सीबीआई जाँच की जाये जिससे दोनो सुसाइट केस मे दोषी लोगों पर कठोर से कठोर कार्यवाही हो।