भगवान श्री कृष्ण ने साढे 5 हजार वर्ष पूर्व प्रकृति पूजन शुरू कराया : श्रीकृष्णाश्रय

भगवान श्री कृष्ण ने साढे 5 हजार वर्ष पूर्व प्रकृति पूजन शुरू कराया : श्रीकृष्णाश्रय

घोड़ाडोंगरी । नगर में चल रही रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन पंडित श्री कृष्णश्रय शास्त्री ने कथा का प्रारंभ सुंदर भजन हे प्रभु मुझे बता दो चरणों में कैसे आऊं से की। उन्होंने कहा कि जब भी परमेश्वर हमारे साथ होते हैं तो तो सब बंधन खुल जाते हैं और जब वह जब प्रभु को छोड़कर माया को लेकर आते हैं तो सारे बंधन अपने आप बंध जाते हैं। श्री कृष्ण की लीलाओं पूतना वध, माखन चोरी सहित अन्य का वर्णन किया।देखे वीडियो

 

उन्होंने कहा कि माता को अपने बच्चों का लालन-पालन स्वयं करना चाहिए। माता यशोदा कई दासियां होने के बावजूद अपने हाथों से श्री कृष्ण के लिए माखन बनती थी। जो कार्य कर रहे हैं उसे ही पूर्ण निष्ठा के साथ करना कि भक्ति है। भक्ति के लिए साधन की जरूरत नहीं है। जिस स्थिति में है परस्थिति में है भगवान का भाव कर भक्ति कर सकते हैं।देखे वीडियो

 

ज्ञान से परमात्मा पकड़ में नहीं आता। प्रेम और भक्ति से ही परमात्मा को पकड़ा जा सकता है ।गिरिराज पूजन का महत्व बताते हुए कहा कि श्री कृष्ण ने साढे 5000 वर्ष पूर्व गिरिराज जी का पूजन प्रारंभ कराया था । आज बड़े-बड़े आयोजन में पर्यावरण बचाने की बात कही जाती है। सनातन धर्म हजारों वर्ष से यही शिक्षा दे रहा है की प्रकृति का सम्मान और पूजन और संरक्षण करना चाहिए। कथा सुनने के बाद अपने जीवन में जो परिवर्तन लाता है उसे ही लाभ मिलता है।