घोड़ाडोंगरी । आजादी के पहले के ऐसे राजा महाराजा जिनका किसी न किसी क्षेत्र में विशेष योगदान रहा । उनके बारे में आज भी इतिहास में पढ़ाया जाता है । लेकिन मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी नगर की एक महान शख्सियत ऐसी भी है जिनके जाने के 27 वर्षों बाद भी लोगों के जेहन में उनकी यादें ताजा है । आज भी लोग बताते हैं कि ऐसी शख्सियत उन्होंने अपने जीवन में दूसरी नहीं देखी । जिन्होंने घोड़ाडोंगरी नगर का नाम मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यो तक पहुंचाया।
जहां भी उनका नाम लिया जाता था लोग सम्मान के साथ उनके बारे में बातें किया करते थे । उनकी पुण्यतिथि पर आज हम आपको बता रहे हैं घोड़ाडोंगरी के नगर सेठ के रूप में जिन्हें जाना जाता था ।
सेठ तुलसीराम जी अग्रवाल का आज ही के दिन 01 फरवरी 1997 को देहावसान हुआ था । लोग बताते हैं कि सेठ तुलसीराम जी अग्रवाल के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। व्यापार ,समाज और राजनीति के क्षेत्र में उनका नाम सम्मान और रुतबे के साथ लोग लोग लेते थे । आज कुछ खास बातें उनके बारे में लिखने का प्रयास कर हम इस महान शख्सियत को पुण्यतिथि के अवसर पर अपनी श्रद्धांजलि दें ….जो हमारे आने वाली पीढ़ी को भी पता चले की “कैसे थे घोड़ाडोंगरी के नगर सेठ”
ऐसे थे घोड़ाडोंगरी के सेठ, 70 साल पुरानी बिल्डिंग कह रही कहानी
व्यापार – मुख्यतः ठेकेदारी के व्यवसाय से जुड़े सेठ तुलसीराम अग्रवाल ने अपने व्यापार के माध्यम से इस सतपुड़ा अंचल में एक बड़े वर्ग को रोजगार उपलब्ध कराया । व्यवसाय के माध्यम से लोगों में अपनी एक अलग पहचान बनाई । लोग बताते हैं कि रेलवे की नागपुर डिवीजन के संगठन के विभिन्न पदो पर घोड़ाडोंगरी जैसे छोटे से कस्बे से होना पूरे घोड़ाडोंगरी नगर के लिए गर्व की बात रही है।
सामाजिक क्षेत्र – समाज के हर वर्ग के लोगों की लिए कार्य करने की बात आज विभिन्न मंचों से की जाती है। लेकिन सेठ तुलसीराम जी ऐसे शख्स थे जिनके पिता(सेठ नारायणदास अग्रवाल) ने सन 1957 में घोड़ाडोंगरी में प्राथमिक स्कूल के लिए भवन बनवा कर दिया था । उन्होंने अपने पिता से एक कदम आगे चलते हुए सन 1966 में 11वीं तक की शिक्षा के लिए सतपुड़ा शिक्षा समिति का गठन कर सतपुड़ा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की नींव रखी और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उच्च शिक्षा इस ग्रामीण अंचल में उपलब्ध कराई।
धार्मिक – लोग बताते हैं कि धार्मिक क्षेत्र में दुर्गा चौक में सत्यनारायण मंदिर जो उनके पिता द्वारा बनाया गया था । उसका भी पुनर्निर्माण करने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया । सेठ और सेठानी दोनों ही बड़े धार्मिक प्रवृत्ति के थे । उनके दरबार से कोई खाली हाथ वापस नहीं जाता था । कई गरीब परिवारो को पढ़ाई ,शादी अन्य परेशानियों में आर्थिक मदद करना उनके लिए रोजमर्रा का काम हुआ करता था । लोगों के यहां शादी अन्य कार्यक्रमों के लिए उस समय कोई भवन नहीं हुआ करते थे तो अग्रसेन भवन के पुनर्निर्माण में भी सेठ जी ने विशेष योगदान दिया और एक बेहतर सामाजिक भवन बनने से लोगों कि इस समस्या का भी निराकरण किया।
लोग बताते हैं कि अयोध्या के संत फट्टी वाले बाबा उस समय सेठ जी के यहां बडा आना-जाना था । जिनके सानिध्य में घोड़ाडोंगरी के सतपुड़ा मैदान पर गांव की खुशहाली के लिए कई बार यज्ञ का भी आयोजन कराया गया । उस जमाने में श्री मद भागवत जैसे बड़े आयोजन घोड़ाडोंगरी नगर में सेठ जी के द्वारा संभव हुई।
राजनीति – सामाजिक , धार्मिक कार्यों के साथ ही राजनीति के क्षेत्र में भी एक जाना पहचाना नाम था सेठ तुलसीराम अग्रवाल का जो शुरू से ही जनसंघ से जुड़े हुए थे । जिनका नाम और प्रभाव इतना था कि माननीय अटल बिहारी वाजपेई ,राजमाता सिंधिया ,सुषमा स्वराज ,लालकृष्ण आडवाणी ,मुरली मनोहर जोशी ,कैलाश जोशी , सुंदरलाल पटवा, कुशा भाऊ ठाकरे जैसी महान शख्सियत से घोड़ाडोंगरी के लोगों को सेठ जी के निवास पर मिलने का मौका उपलब्ध हुआ । घोड़ाडोंगरी विधानसभा में भी जनसंघ का अच्छा खासा प्रभाव था । 1962 में जनसंघ के विधायक रहे ,1967 में भारतीय जनसंघ के विधायक रहे। 1977, 1980, 1990 मैं घोड़ाडोंगरी विधानसभा में भाजपा का ही विधायक जीता।
20 वर्षों तक – सेठ तुलसीराम अग्रवाल 20 वर्षों तक घोड़ाडोंगरी नगर के निर्विरोध सरपंच रहे और उन्होंने कई विकास कार्य किये। ऐसे महान शख्सियत को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हमारा यह छोटा सा लेख ..…….

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