माननीय विषेष न्यायाधीष, अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने नाबालिग युवती को बहला-फुसलाकर उसके साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी सुखदेव पुवारे पिता लोठू पुवारे, उम्र-24 वर्ष, निवासी-ग्राम तेलीढ़ाना, हिवरखेड़ी, थाना कोतवाली, जिला-बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 363 भादवि में 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2,000रू का जुर्माना तथा 376(2)(एन) भादवि में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000रू. के जुर्माने से दंडित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा, वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।
घटना का विवरण इस प्रकार है कि पुलिस चौकी खेड़ी में पीड़िता के चाचा ने इस आषय की रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि दिनांक 20.10.2018 का सुबह करीब 06ः00 बजे उसकी भतीजी आयु 17 वर्ष घर से कहीं चली गयी है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर अपरहरण कर ले गया है। जिसकी आसपास व रिष्तेदारी में तलाष की किंतु उसका कोई पता नहीं चला। पीड़िता के चाचा की रिपोर्ट पर गुमइंसान रिपोर्ट दर्ज की गयी तथा अज्ञात आरोपी के विरूद्ध अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दिनांक 07.02.2020 को पीड़िता को दस्तयाब किया गया, उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। उससे पूछताछ कर धारा 161 द.प्र.सं. के कथन लेखबद्ध किये गये, जिसमें उसने बताया कि आरोपी उसे शादी करने का कहकर इन्दौर ले गया था, वहां
किराया का कमरा लेकर उसे रखा तथा उसके साथ शादी करूंगा कहकर कई बार जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाये थे। विवेचना के दौरान डीएनए परीक्षण हेतु वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित की गयी थी, जिनका डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसका डीएनए परीक्षण रिपोर्ट का परिणाम सकारात्मक आया, संकलित किये गये पीड़िता के सैम्पलों में आरोपी के डीएनए की मौजूदगी पायी गयी, जिससे यह तथ्य संदेह से परे प्रमाणित हो गया कि आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ लैंगिक संभोग किया गया। पीड़िता ने भी अपने न्यायालयीन कथन में आरोपी द्वारा उसे इन्दौर ले जाकर किराये के कमरे में रखकर अनेक बार जबरदस्ती गलत काम (बलात्कार) बताया।
आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण मे अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया जिसके आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दंडित किया गया।
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