*व्यक्तित्व निर्माण, लक्ष्य निर्धारण एवं डिजिटल एडिक्शन के दुष्परिणामों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन*
*घोड़ाडोंगरी* । अखिल विश्व गायत्री परिवार, तहसील समन्वय समिति घोड़ाडोंगरी द्वारा युवा जोड़ो अभियान के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय घोड़ाडोंगरी में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, लक्ष्य निर्धारण एवं जीवन निर्माण के उद्देश्य से एक प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में महाविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे समय ध्यानपूर्वक वक्ताओं के विचारों को सुना।
कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती को नमन करते हुए किया गया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत तालियां बजाकर किया गया। कार्यशाला की शुरुआत शासकीय महाविद्यालय घोड़ाडोंगरी के प्राचार्य डॉ. साहेबराव झरबड़े के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने आए हुए वक्ताओं का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों से इसका अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता पूर्व प्राचार्य श्री संतोष कुमार जैन ने विद्यार्थियों को व्यक्तित्व निर्माण एवं जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रभावी तरीकों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास एवं अनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के अंदर कोई न कोई विशेष क्षमता छिपी होती है। जरूरत है उसे पहचानने और सही दिशा में लगाने की। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए संकल्पित होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसे सीख का अवसर मानना चाहिए। जो युवा दृढ़ विश्वास के साथ निरंतर प्रयास करता है, वही जीवन में सफल होता है। इस दौरान उन्होंने बड़े ही सहज भाव से सुनाए गए मुक्तक विद्यार्थियों को बहुत पसंद आए। विद्यार्थियों ने जोरदार तालियों से अपना भाव व्यक्त किया और प्रसन्नचित होकर व्यक्तित्व विकास की आवश्यकता को महसूस किया।
कार्यशाला में सारनी से पधारे श्री विनोद कुमार झरबड़े ने डिजिटल एडिक्शन विषय पर विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने मोबाइल एवं डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मोबाइल का अनावश्यक उपयोग विद्यार्थियों की एकाग्रता, समय प्रबंधन, अध्ययन एवं सामाजिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज युवा मोबाइल में इतना खो गया है कि वह अपने परिवार, पढ़ाई और लक्ष्य से दूर होता जा रहा है। रील्स, गेम्स और सोशल मीडिया की लत विद्यार्थी के भविष्य को कमजोर कर रही है। उन्होंने तकनीक का सदुपयोग करने तथा मोबाइल के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मोबाइल को अपना मालिक नहीं, बल्कि अपना सेवक बनाओ। ज्ञान बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करो, समय बर्बाद करने के लिए नहीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लोग ट्रेन में सफर करते हुए आपस में बात करते हुए घोड़ाडोंगरी से भोपाल पहुंच जाते थे। बातों ही बातों में पहचान, सामाजिक जानकारी और पारिवारिक जानकारी का आदान-प्रदान हो जाता था। परंतु आज इस आधुनिक युग में बड़ी भिन्नता देखी गई है। आज लोग ट्रेन में आपस में बैठे होते हैं परंतु मोबाइल होने के कारण दोनों आपस में बात भी नहीं करते और केवल मोबाइल चलाते-चलाते ही भोपाल पहुंच जाते हैं। यह उदाहरण विद्यार्थियों को बहुत प्रभावित कर गया।
कार्यक्रम में तहसील समन्वयक श्री मनोज पाटणकर ने अतिथियों, महाविद्यालय प्रबंधन एवं उपस्थित विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा संचालित युवा जोड़ो अभियान का उद्देश्य युवाओं को संस्कार, राष्ट्र प्रेम, चरित्र निर्माण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की सकारात्मक शक्ति बनाना है। प्राचार्य सहित समस्त सहायक व्याख्याता एवं स्टाफ के सहयोग से यह कार्यक्रम सफल हुआ। प्रो. हेमंत निरापूरे ने सभी अतिथियों का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया और पुनः महाविद्यालय में कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री हेमंत साहू ने किया। कार्यशाला के समापन पर सभी विद्यार्थियों ने सकारात्मक जीवन जीने, नशे एवं डिजिटल लत से दूर रहने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में राहत पवार, मुन्नालाल, वरिष्ठ सुनील शर्मा, डॉ. यासमीन जिया, डॉ. पंकज गायकवाड़, डॉ. राजेश आर्य, डॉ. ओम प्रकाश बोरकर, डॉ. भूपेंद्र पाटनकर और समस्त स्टाफ के सदस्य उपस्थित रहे।