*ऐतिहासिक लाल थाने में पहुंची विधायक गंगा उईके ब्रिटिश काल की बंदूक को और देश की पहली फिर के इतिहास को करीब से जाना*
रानीपुर ।घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती गंगा सज्जन सिंह उईके ने क्षेत्र के ऐतिहासिक ‘लाल थाने’ (रानीपुर थाना) में स्थित पुलिस म्यूजियम का आकस्मिक अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के दौर में इस्तेमाल होने वाले हथियारों, संचार उपकरणों और पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहद करीब से देखा। म्यूजियम में सहेज कर रखी गई क्षेत्र की पहली एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दस्तावेज़ों को देखकर विधायक भावुक हो उठीं और उन्होंने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की सराहना की।
म्यूजियम प्रभारी ने कराई इतिहास से अनूठी रूबरू
अवलोकन के दौरान म्यूजियम प्रभारी पूनम तिवारी ने विधायक श्रीमती उईके को इस ऐतिहासिक लाल थाने के गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास से अवगत कराया। प्रभारी ने बताया कि ब्रिटिश काल में यह थाना पूरे जिले में अपनी सख्त व्यवस्था और विशेष बनावट के कारण ‘लाल थाने’ के नाम से विख्यात था। आजादी के आंदोलन के दौरान इस थाने ने कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए यहाँ जीवंत रूप में सहेज कर रखा गया है।
जब क्रांतिकारियों के कुल्हाड़ी के वार से दहल उठी थी हुकूमत
म्यूजियम प्रभारी ने विधायक को ब्रिटिश काल के उस ऐतिहासिक वाकये की विस्तृत जानकारी दी, जब स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी सरदार गजन सिंह और विष्णु सिंह गोंड के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने इसी लाल थाने पर अचानक धावा बोल दिया था। क्रांतिकारियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए कुल्हाड़ी के वार से थाने पर हमला किया और देखते ही देखते थाने के पिछले हिस्से को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना के ऐतिहासिक साक्ष्य आज भी इस म्यूजियम की दीवारों और दस्तावेजों में दर्ज हैं।
आकर्षण का केंद्र बनीं पहली एफआईआर और विंटेज बंदूकें
विधायक ने म्यूजियम में रखी उस जमाने की पहली एफआईआर की कॉपी को बेहद बारीकी से पढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी शासनकाल में पुलिस बल द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली विंटेज बंदूकें, कारतूस और अन्य हथियारों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने माना कि इन दुर्लभ हथियारों को देखना अपने आप में इतिहास के पन्नों को पलटने जैसा है, जो हमें उस दौर की कानून व्यवस्था की याद दिलाता है।
पुरानी वर्दियां और दूरसंचार यंत्रों को देख याद आया बीता दौर
म्यूजियम में केवल हथियार ही नहीं, बल्कि उस दौर की पुलिस संस्कृति को भी प्रदर्शित किया गया है। विधायक श्रीमती उईके ने ब्रिटिश काल में
पुलिसकर्मियों द्वारा पहनी जाने वाली विशेष वर्दियों, उनके बैज और बेल्ट के डिजाइन को देखा। इसके अलावा, तत्कालीन समय में कानून व्यवस्था और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए उपयोग होने वाले भारी-भरकम और दुर्लभ दूरसंचार यंत्रों (वायरलेस व टेलीफोन सेट) की कार्यप्रणाली को भी समझा। विधायक ने इस अनूठे संग्रह को जिले की एक बड़ी धरोहर बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।