यज्ञ चिकित्सा और अखंड सीताराम संकीर्तन के स्वास्थ्य लाभों पर बोले डॉ. नवीन वागद्रे

 

 

अधिक मास के पावन अवसर पर बाबाजी की तपस्थली माधव गौशाला, रानीपुर आश्रम में 17 मई से 17 जून 2026 तक आयोजित श्री रामचरितमानस महायज्ञ, अखंड श्री सीताराम नाम संकीर्तन इन दिनों श्रद्धा, अध्यात्म एवं स्वास्थ्य चेतना का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु आश्रम पहुंचकर यज्ञ, अखंड संकीर्तन एवं विशाल भंडारा प्रसादी का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। पूरा आश्रम परिसर “सीताराम-सीताराम” के अखंड जयघोष, वैदिक मंत्रोच्चार एवं भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान बना हुआ है।

इसी क्रम में गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांत प्राकृतिक चिकित्सा प्रमुख डॉ. नवीन वागद्रे जो पूरे महायज्ञ काल में आश्रम में रहकर सेवा एवं स्वास्थ्य जागरण का कार्य कर रहे हैं, उन्होंने यज्ञ चिकित्सा के आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. नवीन ने बताया कि भारतीय वैदिक परंपरा में यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शरीर, मन और पर्यावरण को संतुलित करने वाली समग्र जीवन पद्धति माना गया है। आधुनिक समय में इसे यज्ञोपैथी, अग्निहोत्र थेरेपी अथवा होम थेरेपी के रूप में भी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में उपयोग होने वाले देशी गाय के घृत, गुग्गुल, तुलसी, नीम, कपूर, चंदन, गिलोय, लौंग एवं अन्य औषधीय द्रव्यों की आहुति से उत्पन्न सूक्ष्म वाष्प वातावरण में फैलते हैं, जो मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं वातावरण शुद्धि में सहायक माने जाते हैं।

उन्होंने बताया कि अधिक मास में यज्ञ एवं अखंड रामनाम संकीर्तन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस काल में किए गए जप, तप, यज्ञ एवं “सीताराम” नाम स्मरण से मानसिक तनाव कम करने, मन को शांत करने एवं आध्यात्मिक चेतना बढ़ाने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है। सामूहिक मंत्रोच्चारण एवं संकीर्तन से उत्पन्न सकारात्मक वातावरण व्यक्ति के मनोदैहिक संतुलन को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। महायज्ञ में प्रतिदिन अनेक यजमान श्रद्धापूर्वक यज्ञ में बैठकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में आज रीना -उमेश खैरवा, रवीना -अक्षय खैरवा, ज्योति -धर्मेंद्र खैरवा, इंदरवती -मूलचंद खैरवा, कौशल्या -शिवदीन खैरवा, अनीता -नानू मलैया, नेहा -बृजेश सिनोटिया, जमना -कोमल सिनोटिया, वर्षा-हरिओम साहू, राजकुमार राठौर एवं प्रेमचंद साहू सहित अनेक श्रद्धालु यज्ञ में उपस्थित होकर आहुति एवं पूजन में सहभागी बने।

रानीपुर आश्रम में चल रहे इस दिव्य आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालु यज्ञशाला की परिक्रमा, अखंड श्री सीताराम नाम संकीर्तन एवं भंडारा प्रसादी में सहभागी बन रहे हैं। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस दुर्लभ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महाआयोजन का लाभ उठाने का आह्वान किया है।

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